Friday, 4 December 2015

ठण्ड के दिन

ठण्ड में शाम जल्दी ही रात का कंबल
ओढ़े लेती है

सूरज भी अपने आप को स्वेटर में लपेट लेता है
हम भी आग से चिपक कर
गरमाहट को महशूस करते है

ठण्ड की सुबह-शाम अलसाई सी नज़र आती है
दोपहर की धूप पूछो मत महबूबा सी नज़र आती है
बैठ साथ उसके दिन पलभर में गुजर जाता है

फिर शाम जल्दी से रात का कंबल
ओढ़े लेती है

दिवाली मङ्गलमय हो

धन बरसे उमंग बरसे दीवाली में, हर तरफ से माँ लक्ष्मी की आप पर कृपा बरसे। कुछ दीये बाज़ार से ज्यादा ख़रीदे ताकि उसका घर भी जगमगाये जिसने...