हम देखेंगे,
ज़रूर देखेंगे।
वह दिन ज़रूर आएगा,
जिसका वादा किया गया है,
जो समय की शुरुआत से ही तय है।
जब अत्याचार और ज़ुल्म के
बड़े-बड़े पहाड़
रूई की तरह उड़ जाएँगे।
जब शोषित और दबे हुए लोगों के कदमों से
धरती ज़ोर-ज़ोर से काँपेगी।
और सत्ता में बैठे लोगों के सिर पर
बिजली गरजेगी।
जब ईश्वर के घर से
हर तरह की झूठी पूजा और अन्याय के प्रतीक
हटा दिए जाएँगे।
जो लोग अब तक ठुकराए गए थे,
वही सम्मान के स्थान पर बैठाए जाएँगे।
सभी ताज उछाल दिए जाएँगे,
सभी सिंहासन गिरा दिए जाएँगे।
केवल सत्य और ईश्वर का नाम रहेगा,
जो हर जगह मौजूद है,
जिसे देखा भी नहीं जा सकता,
लेकिन जो सबको देखता है।
तब सच्चाई का नारा गूँजेगा—
"मैं ही सत्य हूँ।"
उस सत्य में मैं भी हूँ,
और तुम भी हो।
और इस धरती पर
जनता का राज होगा—
जिसमें मैं भी हूँ,
और तुम भी हो।