Sunday, November 17, 2019

लोकतंत्र


नेता जी धूप में  घर-घर जाकर सभी लोगों से मिल रहे हैं। जब रामू का घर आया तो वे उसके घर के आगन मे  बिछे  खटिया पर बैठ गए  और कहा कि थोड़ा पानी पिला पानी।  पीने के बाद वोट देने की गुजारिश करके, रहीम के घर की ओर चल दिए।

इलेक्शन का नतीजा  शानदार रहा नेता जी निरविरोध बहुमत से जीते  थे। इलाके से पहली बार कोई नेता राज्य के कैबिनेट में शामिल हुआ था। सब बहुत खुश थे। दो साल बाद नेता जी अपने क्षेत्र का भर्मण करने आए।  मंच पर बैठे कई योजनाओ की फरिस्त सुनाई और वादे किए।  ग्रामवासी बहुत उत्साहित थे।  जब क्षेत्र सूखा ग्रस्त हुआ तो लोगे ने सोचा नेता जी से मदद माँगी जाए।  कुछ लोग नेता जी के आवास पहुंचे पर मिल न पाए।  उनके दफ्तर पर भी गए पर कोई फायदा  नहीं।  सोचा की उनके काफिला को ही रास्ते में रोक लेंगे।  नेता जी का काफिला आने वाला था, सभी राहगीर को वही रोक दिया गया जहां वो थे न आगे जाने दिया न पीछे। पुलिस, अर्ध सेना सड़क पर फैले थे।  जनता एक तरफ खड़ी अपने-आप को नेता जी के सामने बौना या कुछ नहीं होने के अहसास से कुंठित हुई जा रही थी तभी नेता जी की लाल बत्ती वाली गाड़ी सामने से गुजर गई। 

Monday, November 11, 2019

अनोखा बंधन

कौन रहा है बांध मुझे
प्यार का अपनापन
या सांसो का बंधन,
कौन रहा है बांध मुझे
है किसका
अनोखा बंधन

प्रेम ने मुझे बांधा है या
जीवन के रस ने घेरा मुझे
किसके हूँ मैं बंधन में
सवाल बन सोच रहा मेरा मन
मैं चाहू उसे या वो चाहे मुझे
या दोनों बाते है सम्मोहन

मैं मीरा या वो मोहन
है किसका बंधन

कौन रहा है बांध मुझे
है प्यार का अपनापन
या सांसो का बंधन,
कौन रहा है बांध मुझे
है किसका अनोखा बंधन

प्रेम ने मुझे बांधा है या
जीवन के रस ने है घेरे मुझे
किसके हूँ मैं बस में
सवाल बन सोचे रे मेरा मन
मैं चाहू उसे या वो चाहे मुझे
या दोनों बाते है सम्मोहन

मैं मीरा या वो मोहन
जो बांध रही इक डोर हमें
जो खीचें तेरी और मुझे
है किसका बंधन

Sunday, November 10, 2019

एक चुप सौ सुख

नई नवेली दुल्हन जब उसके जिंदगी में आई तो उसकी दुनिया स्वर्ग सी हो गईI वो बस उसको निहारता रहता और मन में हो रही गुदगुदी को छुपाते हुए मुस्कुरा देता I हर बात पर कहता मुझे बहुत अच्छी दुल्हन मिली है।  अब साल होने को आया है, वो अपनी दुल्हन के साथ बहुत खुश हैI उनकी दुल्हन कुछ दिनों से परेशान सी दिखाई दे रही है,उसने कई बार कारण पता करने की कोशिश की पर दुल्हन चुप रहीI क्यूंकि उनकी माँ  ने कहा था की तुम लड़की हो और ये दुनियाँ  का रिवाज है की बस सुनना, बोलना नहीं।  "एक चुप सौ सुख"

बहुत दिन तक वो कुछ नहीं बोली।  जब दर्द हद से बढ़  गया।  एक दिन उसने कहा की उसकी आँखों और सर में दर्द  हैI

वो उसे डॉक्टर से चेक-उप करने ले गया I डॉक्टर ने दुल्हन से पूछा आपने चश्मा लगाना क्यूँ छोड़ दिया? आपकी आँखों की रोशनी पर बहुत असर पड़ रहा है, दवाइयां और चश्मा लेने के बाद दोनों घर आए तो पति ने  पूछा ,तुमने चश्मे वाली बात क्यूँ छुपाई?

 उसकी दुल्हन ने रोते हुए कहा,मुझसे माँ ने कहा था की किसी को मत बताना नहीं तो लोग तुझे अच्छी दुल्हन नहीं कहेंगेI

Saturday, November 9, 2019

पुरानें दोस्त मिले


किताबो के भीतर
मेरे सपनो की दुनिया बसी है
पन्ना बदलते ही बचपन दिखा
पुरानें दोस्त मिले

ख़ुशी,उमंग,झूठे ओर सच्चे
बातो की कहानी मिली
स्कूल की डेस्क पर
कॉलेज के दिनों के तस्वीर मिले

एक पुरानी किताब
के पन्नो में दबा प्यार मिला
गुलाब की पंखुडियो पर लिखा
उसका नाम मिला

सपनो को किताबो से प्रेरणा मिली
जिन्दगी का हर रूप किताबो से ढला
ये वो दोस्त है जो रूठे न कभी
अलमारी में बैठे  मुस्कुराते रहे

सवाल दर सवाल
जब कभी किसी नए सवाल
का जवाब न  मिले
तब अपनी किताब का
पन्ना पलटे

Thursday, November 7, 2019

भोली जनता


एक सियार मंच पर खड़ा भाषण दे रहा था।  जो गिदर है ना  देश को  नोच कर खा रहे है, प्यारी जनता " क्या आप देश को बचाएंगे ? बचाएंगे ?. जनता जो भोली थी, सियार और गीदर में फर्क नहीं जानती थी। या जनता को फ़िक्र नहीं थी। वो खुश थी क्यूंकि कुछ का पेट भरा था ,कुछ के पास आधा ज्ञान था , कुछ धर्म  को बचाना चाहते थे , कुछ के पास पैसा था और कुछ ऐसे थे जो इन सब झंझट में फसना नहीं चाहते थे।

एक दिन जन समर्थन का मेला लगा ,उस मेला में सियार जीत गए ।   कुछ दिन के बाद जनता जो भोली थी, उसे दाल में काला नज़र आने लगा था पर वो समझ चुकी थी।  सियार और गीदर की लड़ाई में जनता के साथ जो हुआ था  वो  ऐसा था "आ बैल मुझे मार "  जनता फिर भी उम्मीद लगाए बैठी है। 

लोकतंत्र

नेता जी धूप में   घर-घर जाकर सभी लोगों से मिल रहे हैं। जब रामू का घर आया तो वे उसके घर के आगन मे   बिछे   खटिया पर बैठ गए   और कहा कि थोड...