Monday, October 15, 2018

शक्ति और स्त्री

दुर्गा का पर्व

स्त्री शक्ति का पर्व
भक्ति का पर्व

लज्जित होती

औरत हर रोज
तार-तार है


माँ कहते हो
मूर्ति को पूजते हो
पाखंड क्यों?

हत्या बेटी की
गर्भपात कराते
पापा करते

बलात्कार है
अत्याचार है यहाँ
आराधना क्यूँ ?

असफल है
पाखंड तुम्हारा.. हां
सिर्फ शोर है

अधिकार दो
शिक्षा का अवसर
जीने का मौका

शक्ति की पूजा
स्त्री का सम्मान
वरदान है



रिंकी


Wednesday, October 10, 2018

A step towards protection of girls


Her eyes are on the wall clock, staring it. She watches time on her wristwatch. Dipti, aren’t you getting late, yes mom, I am leaving right now, she covered her face with stole wanted to hide her face completely in it.  She looked at the street; some people were busy in their own stuff. She thought will these people help her?  If she needs, She started taking the long step to reach the bus stand finally she managed to get the bus.
In the evening she is solving the examination paper, how was the paper? How many marks you would be able to score this time? Well, mom exam was good. I attended all question, may be this time I will score high marks, but ………… she replied. Yes this time you have to make it otherwise you know dad will get angry.
The morning is new but same strange fear and emotion on her face. Go you are late, okay mom. She waved her hand.  The yard looks horrible and scary but she brought courage and aboard in bus. She is sitting in front of a police officer, well done! You are a courageous girl, I have ever met, and your complaint has been logged.  Hey Dipit, Why are you in police station, Is everything fine?
Yes, Mom, I wanted to tell you but, afraid of locked at home and gets punishment without any crime .What are you talking about, please tell me? The few of boys were harassing and teasing me, they stand on the corner of the street and every time pass comment on me. I wanted to tell you but I also know that, If I raise voice. It’s only me who will be blame for everything and you and Dad ask   me to stay at home in sake of my safety. It would be good strategy to be safe for a moment but not good for life.
You all wanted me to score good marks in examination but did not teach me how to stand for self. Please help and teach me the skill to become empower to handle any problem in my life. What if I scored highest mark in academics but fail in my life?
That is why I decided to step forward to solve the problem instead of running away from it.
This incidence may full you with pride and happiness but In India, a according to the National Crime Records Bureau of India, reported incidents of crime against women increased 6.4% during 2012, and a crime against a woman is committed every three minutes.
This is the fact figure of the crime, reasons are known for the crime, but no blueprint to prevent it. Government has its own agenda but civil society also become blind towards the issues, most of the organization focusing on the only issues for which they get the fund. Nowadays funder decides the rational of the problem. Indian social societies do not want to do anything for social issues.

Rinki

Monday, October 1, 2018

रास्ते बदल गए

दोस्ती,नाराज़गी और दिल्लगी
ये सारे अहसास बदल गए
जो भी मेरे करीब थे
वो सब दूर चले गए

रिश्ते जो ज़िन्दगी के सफ़र में बने थे
वो अपनी मंजिल पर पहुँच गए
रंजिश और नफरत किससे करें अब
जो दुश्मन थे
आज कही दूर चले जाए

यूँ तो दोस्तों से मिलना बिछड़ना
अकसर लगा रहता है
उनके चले जाने से लगा
आज कोई अपना खो गया

रास्ते बदलते ही
नज़र भी बदल गई उनकी
हम सोच ही रहे थे
वो अपनी राह चले गए





रिंकी




Sunday, September 23, 2018

ज़िन्दगी और नजरिया


बात–बात पर परेशान होना आज का फैशन है I हम सब अपनी-अपनी परेशानियों से परेशान है I  एक अजीब कहावत है, “ जिंदा है तो परेशान है”  इसका मतलब समझे तो परेशान या टेंशन में रहना ज़िन्दगी के लिए बहुत जरूरी चीज़ है, इसी लत की मैं भी मारी हूँ हर बात पर  परेशान होना मिज़ाज बन गया है I  उस दिन हरे-हरे खेतो,तालाब और नहर देखकर  मन के भीतर तक शकुन मिल रहा था, इसलिए भी की गाँव जिससे मेरा बचपन जूडी था फिर से मेरे नजर के सामने था I बात सिर्फ आँखों तक ही नहीं रह गई थी, मिट्टी,पानी.फसल, जानवर और इन्सान की खुशबू सब अपने से लग रहे थेI

इलेक्ट्रिक रिक्शा  यानी हवा-हवाई अपने ही रफ्तार से चली जा रही हैI मैं अपने आँखों में, फेफड़ों में और दिमाग में सब कुछ कैद करने की कोशिश में थी I  दूर से रेल की आवाज़ सुनाई देती है, जल्दी चलो भाई ये ट्रेन नहीं छूटनी चाहिए ये सुनते ही मेरी परेशानी अचानक मुझ पर हावी हो गई  ड्राइवर ने कहा- सर नहीं छुटेगी में हूँ न, ट्रेन नजदीक आती दिखाई दे रही थी I मैं बाहर से शांत पर अन्दर से परेशान सब सुन और देख रही थी

ड्राइवर ने  कहा - ये भाभी तुम क्यूँ बाज़ार आई, लड़का कहा है?  अब कौन सा पैदल चल कर बाज़ार जाना है, गाड़ी पकड़ो और चले आओ- महिला ने  जवाब में कहा I

 ट्रेन कुछ धीमे रफ्तार से आगे बढ़ रही है पर मैं अभी भी स्टेशन से कुछ दूर थी , परेशानी अब घबराहट में बदलती जा रही थी I रोक न जरा महिला ने कहा, बहुत आगे आ गए हम  और ड्राइवर ये कहते हुए हवा –हवाई को पीछे करने लगा I अब मुझे गुस्सा आने लगा, यहाँ ट्रेन छुटने वाली है और ये भाभी से रिश्तेदारी निभा रहा है लगभग १०० मीटर पीछे जा कर गाड़ी रुकी I महिला ने कहा दीदी जरा पैर हटाई, मुझे लगा कोई समान होगा मेरे पैर के पीछे मैंने पैर एक तरफ किया,

वो सीट से उतर कर पैर रखने वाले जगह पर बैठ गई, नीचे उतारते ही अपने हाथ के सहारे अपने शरीर को आगे की तरफ घसीटने लगी, उसके लिए ये चलना था I अपने कमर से नीचे बेजान हिस्से से चले हुए वो अपनी मंजिल पर पहुँच गई

 ट्रेन की आवाज़ और सामने का दृश्य मेरे अन्दर बहुत देर तक ठहरा रहा I



रिंकी


Saturday, September 15, 2018

अपनी भाषा

हिन्दी भाषा को
बोलने में लज्जाते
शर्म करते

विदेशी बोली
की गुलामी बजाते
शरमाते वो

तिरस्कार
मिले उसे जो बोले
हिंदी भाषा को

गुलामी  शौक
अंग्रेजी बतियाते
नाज़ करते

सम्मान करो
देश महान करो
भाषा अपनी

हिंदी महान
हिन्दुतान की शान
हिंदी महान



रिंकी


शक्ति और स्त्री

दुर्गा का पर्व स्त्री शक्ति का पर्व भक्ति का पर्व लज्जित होती औरत हर रोज तार-तार है माँ कहते हो मूर्ति को पूजते हो पाख...