Wednesday, November 22, 2023

ठाकुर का कुआँ - Om Prakash Valmiki

चूल्‍हा मिट्टी का

मिट्टी तालाब की
तालाब ठाकुर का ।

भूख रोटी की
रोटी बाजरे की
बाजरा खेत का
खेत ठाकुर का ।

बैल ठाकुर का
हल ठाकुर का
हल की मूठ पर हथेली अपनी
फ़सल ठाकुर की ।

कुआँ ठाकुर का
पानी ठाकुर का
खेत-खलिहान ठाकुर के
गली-मुहल्‍ले ठाकुर के
फिर अपना क्‍या ?
गाँव ?
शहर ?
देश ?

रब की तलाश

पहला कदम था प्यार का , दिल में जागी एक चाहत , किसी का नाम मालूम न था , बस मन में थी तड़प-इबादत। फिर पास आने की आरज़ू जगी ,   याद म...