Everyone does have a book in them. Here is few pages of my life, read it through by my stories,poetry and articles.
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मैं हैरान हूं यह सोचकर -महादेवी वर्मा
किसी औरत ने क्यों नहीं उठाई उंगली ? तुलसी दास पर , जिसने कहा , “ ढोल , गंवार , शूद्र , पशु , नारी , ये सब ताड़न के अधिकारी। मैं ...
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मेरे सपनो को जानने का हक रे क्यों सदियों से टूट रही है इनको सजने का नाम नहीं मेरे हाथों को जानने का हक रे क्यों बरसों से खली पड़ी हैं इन्हें...
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इस घट अंतर बाग़-बग़ीचे, इसी में सिरजनहारा। इस घट अंतर सात समुंदर, इसी में नौ लख तारा। इस घट अंतर पारस मोती, इसी में परखन हारा। इस घट अंतर अन...
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चुप ने ऐसी बात कही खामोशी में सुन बैठे साथ जो न बीत सके हम वो अँधेरे चुन बैठे कितनी करूं मैं इल्तिजा साथ क्या चाँद से दिल भर कर आँखे थक गय...

