Sunday, May 24, 2026

एक ही दिल है, कितनी बार टूटेगा-Rinki

 


भाग – 1

रात के लगभग ग्यारह बज रहे थे। कमरे की हल्की पीली रोशनी में छत पर लगा पंखा लगातार घूम रहा था। वह बिस्तर पर चुपचाप लेटी हुई उसे देख रही थी। पिछले एक घंटे से उसकी नज़र उसी पंखे पर टिकी थी, जैसे उसकी घूमती हुई पंखुड़ियाँ उसे किसी गहरी खामोशी में खींच रही हों।

उसके मन में अजीब-अजीब ख्याल आ रहे थे। कुछ पल के लिए उसे लगता, काश सब रुक जाए। ये दर्द, ये बेचैनी, ये लगातार चलती सोच — सब खत्म हो जाए। लेकिन अगले ही पल वो खुद को रोक लेती। वो मरना नहीं चाहती थी। उसे बस इस दर्द से थोड़ी राहत चाहिए थी।

पिछले कुछ दिनों में उसने ठीक से खाना नहीं खाया था। भूख जैसे उससे नाराज़ हो गई थी। माँ जबरदस्ती प्लेट रख देतीं, लेकिन दो निवाले के बाद ही उसका मन भर जाता। अब तो उसे खाने से भी डर लगने लगा था। नींद से डर लगता था। अकेलेपन से डर लगता था। और सबसे ज्यादा उसकी यादों से।

घर वाले अक्सर पूछते,
“क्या हुआ है? इतनी चुप क्यों रहती हो?”

वो हर बार मुस्कुराने की कोशिश करती और धीरे से कह देती,
“बस तबीयत ठीक नहीं है…”

लेकिन वो जानती थी कि उसकी तबीयत नहीं, उसकी आत्मा थक चुकी थी।

वो उन लोगों में से थी जिन्हें हालात खुलकर रोने भी नहीं देते। इसलिए उसका दर्द आँसुओं की जगह भीतर जमा होता जा रहा था। कभी-कभी उसे लगता उसका दिमाग इस उदासी से हार चुका है। उसे आराम चाहिए। लेकिन उसका दिल उस दर्द को छोड़ने को तैयार नहीं था।

उसे डर लगता था कि अगर उसने इस दर्द को जाने दिया, तो शायद वो उस इंसान को भी खो देगी जिससे उसने सबसे ज्यादा प्यार किया था। और अगर इसी दर्द को पकड़कर रखेगी, तो शायद खुद खो जाएगी।

इन्हीं दो बातों के बीच उसकी जिंदगी अटक गई थी।

ऑफिस में वो पहले की तरह हँसती थी। सबके साथ बात करती, मीटिंग में शामिल होती, मजाक भी कर लेती। किसी को अंदाज़ा नहीं होता कि उसके चेहरे पर जो मुस्कान है, वो सिर्फ एक मुखौटा है। लेकिन घर लौटते ही जैसे उसकी सारी ताकत खत्म हो जाती।

कमरे में आते ही वो चुप हो जाती। मोबाइल हाथ में लेकर घंटों उसकी तस्वीरें देखती रहती। उसकी नई शादी की तस्वीरें। उसकी मुस्कान। उसकी नई जिंदगी।

हर तस्वीर उसके दिल में कुछ और तोड़ देती।

उसने फोन बंद किया और आँखें बंद कर लीं। लेकिन यादें बंद नहीं हुईं। उसे उसका छूना याद आया। उसकी आँखें। उसके साथ बिताया हर छोटा पल। उसका आसपास होना। उसकी बातें।

वो सब उसकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका था।

ये पहली बार नहीं था जब उसका दिल टूटा था। पहले भी लोग उसकी जिंदगी में आए थे और चले गए थे। लेकिन हर बार उसने पूरे दिल से प्यार किया था। वो प्यार में आधापन नहीं समझती थी। उसके लिए रिश्ता मतलब बराबरी, ईमानदारी और पूरा साथ था।

लेकिन लोग अक्सर उसके प्यार की गहराई से डर जाते थे। वो उसे चाहते थे, लेकिन अपने हिसाब से। जितना उन्हें आसान लगे, उतना प्यार। जितना उन्हें सही लगे, उतना साथ।

और इस बार भी वही हुआ।

जब उसने उससे पूछा था,
“अगर प्यार मुझसे था, तो शादी किसी और से क्यों?”

तो उसने बहुत शांत आवाज़ में कहा था,
“मजबूरी थी…”

बस वही पल था जब उसके अंदर कुछ टूट गया। उसने उसी दिन रिश्ता खत्म कर दिया। बिना किसी लड़ाई के। बिना किसी शोर के।

लेकिन रिश्ता खत्म करने से प्यार खत्म नहीं हुआ।

उसका दिल आज भी वहीं अटका हुआ था।

वो फिर से पंखे को देखने लगी। पंखा लगातार घूम रहा था। बिल्कुल उसकी जिंदगी की तरह। ऊपर से सब सामान्य दिखता हुआ, लेकिन अंदर ही अंदर धीरे-धीरे टूटता हुआ।

शेष अगले भाग में…

तेज़ धूप -रिंकी ✨

 तेज़ धूप ने

जीवन की राह सँवारी,

छाँव सुला देती।

जलते पथरों पर
नंगे पाँव चलना सीखा,
हौसले खिल उठे।

तपती हवाओं ने
मन को कुंदन कर डाला,
सपने चमक उठे।

अगर मिलती छाँव,
शायद ठहर जाता मैं,
धूप ने बढ़ना सिखाया।

एक ही दिल है, कितनी बार टूटेगा-Rinki

  भाग – 1 रात के लगभग ग्यारह बज रहे थे। कमरे की हल्की पीली रोशनी में छत पर लगा पंखा लगातार घूम रहा था। वह बिस्तर पर चुपचाप लेटी हुई उसे देख...