यह बगुलों का शहर है-जौन एलिया

 ऐ बेचैन मनो! यह ऐसा शहर है जहाँ लोग खुद ही कई रूपों में जीते हैं। यह बगुलों का शहर है — बाहर से सफ़ेद, भीतर से अलग। धरती धूल से भरी है, ...