जौन एलिया
एक एहसास हैं—जहाँ इंसान अपने ही विचारों में उलझा रहता है, रिश्तों की सच्चाई को समझने की कोशिश करता है, और भीतर से खुद को खोजता रहता है।
1.
“मैं भी बहुत अजीब हूँ, इतना अजीब हूँ कि बस
खुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं।”
2.
“इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ,
वर्ना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैंने।”
3.
“बहुत नज़दीक आती जा रही हो,
बिछड़ने का इरादा कर लिया है क्या?”
4.
“शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई,
लेकिन यक़ीन सबको दिलाता रहा हूँ मैं।”
5.
“कौन इस घर की देखभाल करे,
रोज़ इक चीज़ टूट जाती है।”
6.
“अब नहीं कोई बात ख़तरे की,
अब सभी को सभी से ख़तरा है।”
7.
“तुम्हारा हिज्र मना लूँ अगर इजाज़त हो,
मैं दिल किसी से लगा लूँ अगर इजाज़त हो।”
8.
“हम कहाँ और तुम कहाँ जानाँ,
हैं कई हिज्र दरमियाँ जानाँ।”
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