Tuesday, October 13, 2015

प्यार के देहलीज पर

प्यार होने या न होने मे
फर्क बस इतना था
जब वो था तो,मैं नहीं था
जब मैं था वो नहीं

प्यार के देहलीज के लकीर पर
हम दोनों खड़े रहे
सुबह से शाम तक परछाई बदली
हम खड़े रहे ठुठे पेड़ की तरह

मौसम बदले
हम खड़े रहे
समाज की तरफ मुह किया
बस उनकी सहमति के लिए

आज हम दोनों खड़े है आमने-सामने

अजनबी सा चेहरा लिए....

Rinki

दोस्त पुराने

न जाने कितने दिनों के बाद कुछ दोस्तों से मुलाकात हुई मैं देखती उन्हें छूती उन्हें आँखों से पढ़ती यादों के पन्नों को...