Thursday, March 22, 2018

कविता


(विश्व काव्य दिवस के उपलक्ष में)



कागज़ पर सियाही से
उकेरी हुई
मन का संवाद
है
कविता

समय चुरा के सब से छुप कर
अपने आप से बात करना है
कविता


चुप रहकर
कुछ न कहकर
आंसुओं में शब्द डुबोकर
लिखना है
“कविता”


वो दोस्त न मिले कभी
 दिखे कभी
उनसे मिलने जुलने का
एक मात्र माध्यम
कविता


दोस्त जो इन्टरनेट से
दोस्ती निभाते है
बुरी से बुरी कविता को
भी
अच्छी रचना बताते है
उन सब दोस्तों को सलाम करती
मेरी कविता



रिंकी

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