Sunday, November 30, 2025

बाबा नीम करोरी महाराज

 

बाबा नीम करोरी महाराज एक महान साधु और हनुमान भक्त थे, जिन्होंने भारत के विभिन्न हिस्सों में अपनी आस्था और सेवा के माध्यम से कई मंदिरों का निर्माण किया। उनका असली नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा था और वे उत्तर प्रदेश के एक धनी परिवार में पैदा हुए थे। ग्यारह वर्ष की उम्र में उनकी शादी हो गई, लेकिन उन्होंने विवाह के तुरंत बाद घर छोड़ साधुता का मार्ग अपनाया। बाद में वे पूरे उत्तर भारत में घूमें और उन्होंने कई मंदिरों का निर्माण करवाया, जिनमें प्रमुख रूप से हनुमान जी के मंदिर थे।

नीम करोरी बाबा ने स्वयं शारीरिक श्रम कर कई मंदिरों की नींव रखी और मूर्तियों की स्थापना भी की। उनके भक्त बताते हैं कि उन्होंने कई मंदिरों में हनुमान जी की मूर्तियां अपने हाथों से बनाई और पूजा-अर्चना की। बाबा का आश्रम और मुख्य धाम कांची धाम के नाम से प्रसिद्ध है, जो उत्तराखंड में स्थित है। वे अपने भक्तों को सेवा, भक्ति और सादगी की शिक्षा देते थे। कई विदेशी भक्त भी उनके शिष्य बने और बाबा की प्रसिद्धि भारत के बाहर भी फैली।

उनकी जीवन गाथा में यह बात उल्लेखनीय है कि उन्होंने मंदिर निर्माण के माध्यम से केवल धार्मिक आस्था को बढ़ावा दिया बल्कि लोगों को एकजुट होने और सेवा करने की प्रेरणा भी दी। बाबा नीम करोरी महाराज की स्मृति आज भी उनके द्वारा स्थापित मंदिरों में उनके भक्तों द्वारा श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजी जाती है।

यह कहानी बाबा नीम करोरी के साधु जीवन और मंदिर निर्माण की उनके समर्पण और आध्यात्मिकता की झलक है।

 

 

प्रेम की झलक का इंतज़ार करती है।

इंतज़ार की वो ख़ामोश राहें,
जहां टूटे कदम धीरे-धीरे बढ़ते हैं।
दिल में छुपी एक अनकही दास्तां,
जो प्रेम की झलक का इंतज़ार करती है।

हर ज़गह, हर पल, बस एक तेरी झलक,
हुजूरत की भीड़ में तन्हा सा सुकून।
आँखों में जैसे कोई नमी सी रह गई,
जो वो प्यार लौट आने की दुआ करती है।

फिर भी, किसी ख़ामोश सुबह की तरह,
जो अपने रंगों को संभाल के रखती है,
वो उम्मीद मुस्कुराती है,
कि कहीं कोई लौट कर आएगा मेरे पास।

इस पल के साए में जी रहा हूँ,
प्रेम की वो मिश्री जो कभी मीठी थी,
वो बहारें फिर आएंगी,

बस थोड़ा और इंतज़ार करूँगा मैं। 

Rinki

बाबा नीम करोरी महाराज

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