इंतज़ार की वो ख़ामोश राहें,
जहां टूटे कदम धीरे-धीरे बढ़ते हैं।
दिल में छुपी एक अनकही दास्तां,
जो प्रेम की झलक का इंतज़ार करती है।
हर ज़गह, हर पल, बस एक तेरी झलक,
हुजूरत की भीड़ में तन्हा सा सुकून।
आँखों में जैसे कोई नमी सी रह गई,
जो वो प्यार लौट आने की दुआ करती है।
फिर भी, किसी ख़ामोश सुबह की तरह,
जो अपने रंगों को संभाल के रखती है,
वो उम्मीद मुस्कुराती है,
कि कहीं कोई लौट कर आएगा मेरे पास।
इस पल के साए में जी रहा हूँ,
प्रेम की वो मिश्री जो कभी मीठी थी,
वो बहारें फिर आएंगी,
बस थोड़ा और इंतज़ार करूँगा मैं।
Rinki
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