Everyone does have a book in them. Here is few pages of my life, read it through by my stories,poetry and articles.
Wednesday, December 20, 2017
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अंतिम शब्द
जब मैं अपने अंतिम शब्द लिखूँगी… तब रिश्तों को बेड़ियाँ , प्रेम को पाखंड , सुख को झूठ , और दुख को साथी लिखूँगी। परमेश्वर को धोखा , पैसों क...
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मेरे सपनो को जानने का हक रे क्यों सदियों से टूट रही है इनको सजने का नाम नहीं मेरे हाथों को जानने का हक रे क्यों बरसों से खली पड़ी हैं इन्हें...
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इस घट अंतर बाग़-बग़ीचे, इसी में सिरजनहारा। इस घट अंतर सात समुंदर, इसी में नौ लख तारा। इस घट अंतर पारस मोती, इसी में परखन हारा। इस घट अंतर अन...
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चुप ने ऐसी बात कही खामोशी में सुन बैठे साथ जो न बीत सके हम वो अँधेरे चुन बैठे कितनी करूं मैं इल्तिजा साथ क्या चाँद से दिल भर कर आँखे थक गय...

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शनिवार 31 जुलाई 2021 शाम 5.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
ReplyDeleteजी रिंकी जी। आपके ब्लॉग पर मेरी सबसेपसंदीदा रचना। ईश्वर दूसरों के प्रति सद्भावना में ही तो बसता है। दूसरों के लिए अच्छा सोचना एसऔर करना ही उसकी सच्ची आराधना है। जिसमें उसका अस्तित्व व्याप्त हो वह व्यक्ति सुखी सच्ची सद्भावना से भरा होता है।
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