Everyone does have a book in them. Here is few pages of my life, read it through by my stories,poetry and articles.
Wednesday, December 20, 2017
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मैं हैरान हूं यह सोचकर -महादेवी वर्मा
किसी औरत ने क्यों नहीं उठाई उंगली ? तुलसी दास पर , जिसने कहा , “ ढोल , गंवार , शूद्र , पशु , नारी , ये सब ताड़न के अधिकारी। मैं ...
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मेरे सपनो को जानने का हक रे क्यों सदियों से टूट रही है इनको सजने का नाम नहीं मेरे हाथों को जानने का हक रे क्यों बरसों से खली पड़ी हैं इन्हें...
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मुल्ला नसरुद्दीन एक सड़क से गुजर रहा था। शाम का समय था और अंधेरा उतर रहा था। अचानक उसे बोध हुआ कि सड़क बिल्कुल सूनी है, कहीं कोई नहीं है और वह...
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इस घट अंतर बाग़-बग़ीचे, इसी में सिरजनहारा। इस घट अंतर सात समुंदर, इसी में नौ लख तारा। इस घट अंतर पारस मोती, इसी में परखन हारा। इस घट अंतर अन...

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शनिवार 31 जुलाई 2021 शाम 5.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
ReplyDeleteजी रिंकी जी। आपके ब्लॉग पर मेरी सबसेपसंदीदा रचना। ईश्वर दूसरों के प्रति सद्भावना में ही तो बसता है। दूसरों के लिए अच्छा सोचना एसऔर करना ही उसकी सच्ची आराधना है। जिसमें उसका अस्तित्व व्याप्त हो वह व्यक्ति सुखी सच्ची सद्भावना से भरा होता है।
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