Wednesday, August 12, 2026

दो अजनबी

 फ़ोन बजा। बूढ़े ने "हैलो" कहा।

सामने से एक लड़का बोला, "सर, अकाउंट ब्लॉक हो जाएगा, अभी वेरिफाई करना पड़ेगा।"

बूढ़े ने धीरे से कहा, "बेटा मुझे ये सब नहीं आता। मेरे बच्चे शाम को आएँगे, तब बात करना। मैं अस्सी साल का हूँ, कैंसर का मरीज़ हूँ।"

फ़ोन पर कुछ देर सन्नाटा रहा।

फिर लड़के की आवाज़ आई, "सर... माफ़ करना। मैं फ्रॉड करने के लिए फ़ोन किया था।"

बूढ़ा चुप रहा, फिर पूछा, "क्यों करते हो बेटा ये सब? इतने ईमानदार लगते हो।"

लड़का रुक गया। फिर बोला, "माँ को कैंसर है सर। इलाज के लिए पैसे नहीं हैं।"

इतना कहते ही वो रो पड़ा।

फ़ोन के दूसरी तरफ़ बूढ़ा भी रोने लगा।

दो अजनबी, जिन्हें एक-दूसरे का नाम भी नहीं पता था, फ़ोन पर अपना-अपना दर्द बाँट रहे थे। 

Monday, August 3, 2026

मैं अधूरे इश्क़ की दरगाह पर नहीं झुकती

 

तेरी मोहब्बत अगर
पूरी इबादत नहीं,
तो मैं उस सजदे से उठ जाती हूँ।

क्योंकि आधा प्रेम
ख़ुदा तक नहीं पहुँचता,
वो बस दिल को
थका देता है।

तुझसे जुदा होना
कोई हार नहीं,
ये तो मेरी रूह का
वुज़ू है।
तेरे पास रहकर
खुद को गँवा देना—
ये इश्क़ नहीं,
ये ग़फ़लत है।

मुझे वो आग चाहिए
जो जला कर ख़ाली करे,
वो नहीं
जो सुलगाकर
राख में बाँध दे।

अगर तू मुकम्मल नहीं,
तो मेरा दूर जाना ही
मेरी इबादत है।
क्योंकि अधूरा इश्क़
रूह को
टुकड़ों में बाँट देता है।

तेरा न होना
मेरे आधा होने से बेहतर है।
ख़ाली होना
टूटने से बेहतर है।

मैं ख़ुद को
उस ख़ामोशी में सौंपती हूँ
जहाँ कोई नाम नहीं,
कोई दावा नहीं—
सिर्फ़ सच है।

और सच ये है—
जो प्रेम मुझे ख़ुदा तक न ले जाए,
उसे मैं
इश्क़ नहीं कहती।

दो अजनबी

 फ़ोन बजा। बूढ़े ने "हैलो" कहा। सामने से एक लड़का बोला, "सर, अकाउंट ब्लॉक हो जाएगा, अभी वेरिफाई करना पड़ेगा।" बूढ़े ने...