Friday, September 25, 2026

मेरे धागे लौटा दो, माधव

 मेरे धागे लौटा दो, माधव

1.

मेरे धागे लौटा दो माधव,
मेरी मन्नत अधूरी रह गई,
जिस आस में बाँधा था धागा,
वो आस कहीं दूर बह गई।

तेरे द्वार पर सिर झुकाकर,
सबसे छुपकर रोया था,
मन की सारी पीड़ा लेकर,
बस तुझसे ही कुछ माँगा था।

जो माँगा था दिल ने तुझसे,
वो सपना अधूरा रह गया

2.

मैं अपने धागे वापस नहीं लूंगी माधव। 
मेरा एक कर्ज तुम्हारे भी सर हमेशा रहेगा।
तुम्हारे दर से भी कोई खाली हाथ आता है, 
यह कलंक तुमको भी सहना पड़ेगी। 

Tuesday, September 1, 2026

रब की तलाश

पहला कदम था प्यार का,

दिल में जागी एक चाहत,

किसी का नाम मालूम न था,

बस मन में थी तड़प-इबादत।

फिर पास आने की आरज़ू जगी,

 याद में मिलने लगा सुकून,

 जब भी उससे दूर हुए,

 बेचैन हुआ मन, बढ़ा जुनून।

 

फिर ऐसा प्यार हुआ गहरा,

 कि खुद को हम भूल गए,

 जिसे चाहा, उसी में खोकर,

हर तरफ़ बस वही पाए।

 

फिर धीरे-धीरे "मैं" मिटने लगा,

 अहम का वजूद गुम हो गया, जो बचा,

 वो सिर्फ़ वही था,

हर कतरा उसी में समा गया।

फिर आई वो मिलन की घड़ी,

 जिसे ढूँढा था हर राह-गुज़र,

 वो तो सदा ही पास खड़ा था,

 अपनी हर साँस के अंदर।

 

उस अद्भुत मिलन को देखकर,

हैरान खड़ी रह गई नज़र,

कोई शब्द न बयाँ कर पाया,

सब समझ से परे था वो मंज़र।

 

आख़िर में मन शांत हो गया,

सदा के लिए उसी में बस गया,

 खुद को मिटाकर सब कुछ पाया,

सच्चा रब प्यार में मिल गया।

 Rinki 

मैं हैरान हूं यह सोचकर -महादेवी वर्मा

  किसी औरत ने क्यों नहीं उठाई उंगली ? तुलसी दास पर , जिसने कहा , “ ढोल , गंवार , शूद्र , पशु , नारी , ये सब ताड़न के अधिकारी।   मैं ...