Wednesday, January 14, 2026

जॉन एलिया- मैं ईश्वर के साथ हूँ,

जॉन एलिया उर्दू के एक बहुत ही लोकप्रिय और गहरे भावों वाले शायर थे, जिनकी शायरी आज भी लाखों दिलों को छूती है. उनका असली नाम असग़र गिलानी था और वे 1931 में पाकिस्तान के नवाबशाह में पैदा हुए थे. जॉन एलिया ने अपनी पूरी ज़िंदगी कराची में बिताई और वहीं 2002 में इंतक़ाल कर गए.

​शायरी की ख़ास बात

जॉन एलिया की शायरी बहुत सीधी, सरल और बेबाक़ भाषा में होती है, लेकिन उसके पीछे गहरा दर्द, ज़िंदगी के सवाल और इंसानी तनाव छिपा होता है। वे रिवायती शायरी के बजाय ज़िंदगी के असली मसाइल  दर्द, अकेलापन, निराशा, इंसानी रिश्ते और फ़िलॉसफ़ी  पर लिखते थे. उनकी ग़ज़लें और नज़्में आज भी युवाओं के बीच बहुत पसंद की जाती हैं।

​विचारधारा और अंदाज़

जॉन एलिया एक अलग तरह के सोचने वाले शख़्स थे  वे रूढ़ियों, झूठे रिवाज़ों और दिखावे के ख़िलाफ़ बोलते थे. उनकी शायरी में नास्तिकता, इंसानी आज़ादी और ज़िंदगी के बेमतलबपन को लेकर गहरी चिंतन झलकती है. उनके अंदाज़ में एक तरह का व्यंग्य भी होता था, जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर देता था।

​ज़िंदा शायरी

आज भी जॉन एलिया की शायरी यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फ़ेसबुक पर बहुत वायरल होती है. उनके अंकल जॉन एलिया के नाम से बने चैनल और पेज उनकी आवाज़ में उनकी ग़ज़लें सुनाते हैं, जिससे नई पीढ़ी भी उनसे जुड़ पाती है. जॉन एलिया ने साबित किया कि शायरी सिर्फ़ प्रेम तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ज़िंदगी के हर पहलू को छू सकती है।


मैं ईश्वर के साथ हूँ,



तुम किसके साथ हो?
हर पल “न होने” के भाव के साथ हूँ,
तुम किसके साथ हो?

मुझे ऐश-आराम और स्थायी सुख का भ्रम स्वीकार नहीं,
मैं तो नश्वरता (मिट जाने) के साथ हूँ,
तुम किसके साथ हो?

मैं हूँ या नहीं हूँ — यही मेरी हैरानी है,
हर पल “होने और न होने” के बीच हूँ,
तुम किसके साथ हो?

मैं नई खुशबू के जादू की धूल-सा हूँ,
यानी हवा की तरह हूँ,
तुम किसके साथ हो?

आज तुम भी मुझसे कुछ सुनो,
कि मैं अहंकार के इंकार के साथ हूँ,
तुम किसके साथ हो?

इस धरती पर मेरा कोई स्थायी मौसम नहीं,
मैं तो हवा-पानी (प्रकृति) के साथ हूँ,
तुम किसके साथ हो?


No comments:

Post a Comment

Thanks for visiting My Blog. Do Share your view and idea.

A Symphony of Regret

I left the lights on in the hallway floor... Silently rehearsing what I'll never get to say. The clock on the wall is ticking too loud...