Friday, January 16, 2026

कैंची धाम बनाने की कहानी | बाबा नीब करोरी महाराज की दिव्य लीला

 कैंची धाम, उत्तराखंड में स्थित एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थल है, जो बाबा नीब करोरी महाराज की कृपा और चमत्कारों से जुड़ा हुआ है। यह धाम आज लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

कहा जाता है कि बाबा नीब करोरी महाराज नैनीताल–अल्मोड़ा मार्ग पर एक स्थान पर आकर रुके, जहाँ दो पहाड़ी रास्ते कैंची के आकार में एक-दूसरे को काटते हैं। इसी कारण इस स्थान का नाम कैंची धाम पड़ा।

उस समय यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ था और पूरी तरह सुनसान था। बाबा यहाँ ध्यान में लीन रहते और हनुमान जी की भक्ति में मग्न रहते थे। बाबा ने अपने भक्तों से कहा कि इसी स्थान पर हनुमान जी का मंदिर बनाया जाएगा।

मंदिर निर्माण आसान नहीं था। दुर्गम पहाड़ी रास्ते, संसाधनों की कमी और मौसम की कठिनाइयाँ बार-बार सामने आईं। लेकिन भक्तों का विश्वास बाबा पर अडिग था। कहा जाता है कि जब भी कोई बाधा आती, बाबा की कृपा से समाधान अपने आप हो जाता।

वर्ष 1964 में कैंची धाम में हनुमान जी की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई। इस ऐतिहासिक अवसर पर बाबा नीब करोरी महाराज स्वयं उपस्थित थे। तभी से यह धाम आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र बन गया।

बाबा नीब करोरी महाराज ने भविष्यवाणी की थी कि एक दिन यहाँ इतनी भीड़ होगी कि रास्ते छोटे पड़ जाएंगे। आज हर वर्ष 15 जून को स्थापना दिवस के अवसर पर लाखों श्रद्धालु कैंची धाम पहुँचते हैं, और बाबा की भविष्यवाणी सच साबित होती दिखती है।

आज कैंची धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और विश्वास का प्रतीक है। भक्तों का मानना है कि यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूरी होती है।

कैंची धाम हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति, सेवा और विश्वास से असंभव भी संभव हो सकता है। बाबा नीब करोरी महाराज की कृपा आज भी भक्तों के जीवन को दिशा दिखा रही है।

जय श्री राम। जय हनुमान।

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