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Monday, June 8, 2026

शर्मिंदगी है हमको बहुत हम मिले तुम्हें- जॉन एलिया

 

मुझे इस बात की शर्म है कि मैं तुम्हारी ज़िंदगी में आया।

तुम पूरी तरह खुशियों से भरे हुए थे,

लेकिन मेरी वजह से तुम्हें दुःख भी मिले।

मुझे इस बात का अफ़सोस नहीं कि

मैं खुद को पूरी तरह समझ नहीं पाया,


अफ़सोस तो इस बात का है

कि तुम भी अपने आप को पूरा नहीं पा सके।

अगर हमारे रिश्ते का हिसाब लगाया जाए,
तो मुझे शर्म आती है कि

 

मैं बार-बार तुम्हारी ज़िंदगी में आया और तुम्हें तकलीफ़ें मिलीं।

तुम अपने ख़्वाबों और तमन्नाओं की दुनिया में क्या तलाश रहे थे,
मैं भी जब तुम्हें मिला तो बिखरा हुआ और उलझा हुआ मिला।

काश तुम किसी और के नहीं,
बल्कि अपने ही सहारे मज़बूत और मुकम्मल बन सको।

 

इस छल-कपट और बहानों से भरी दुनिया में,
अगर मुझे कोई सच्चा हमदर्द मिले,
तो मेरी दुआ है कि वही सच्चा साथी तुम्हें भी मिले।

मैं तुम्हारे लिए सख़्त मिज़ाज होने की दुआ नहीं करता,
बल्कि चाहता हूँ कि तुम्हारा दामन हमेशा मोहब्बत,

एहसास और आँसुओं की नमी से भरा रहे।

 

मैं आज तक खुद को पूरी तरह समझ नहीं पाया,
न जाने मेरे दिल और शौक़ की कैसी-कैसी दुनिया तुमने देखी होगी।

तुमने मेरे दिल में बहुत लंबा सफ़र किया,
और मुझे शर्म है कि उस सफ़र में तुम्हें बहुत से ज़ख़्म मिले।

मेरी दुआ है कि मुझे कोई और हव्वा मिले,
और तुम्हें कोई ऐसा आदम मिले

जो तुम्हें मुझसे ज़्यादा समझ सके, ज़्यादा खुश रख सके।

 

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