Monday, 18 November 2013

तुम मेरी चाहत हो


तुम्हे क्या बताया मैंने
की तुम मेरी चाहत हो
ये आज की बात नहीं
तुम ही मेरी हसरत हो


तुम्हे सोचना अलग सा क्यों है
ये अँधेरे में उजले जैसे है
दुनिया की सचाई में
सपने जैसा है


हो तुम मेरी जिंदगी की किताब
का सुनेहरा सा हिस्सा
हो न खत्म ऐसा किस्सा

खोई राहों की मंजिल
मेरे प्यार का साहिल
तुम ही तुम हो मेरी चाहत
अनमोल निशनी की तरह




कल्पवृक्ष ! है हम सभी

बहुत देर तक चलते रहने से वो थक गया थाI एक विशाल पेड़ के नीचे आकर उसने कहा आराम कर लेता हूँ और उसका मन और शरीर थकान से मुक्त हो गयाI उसके ...