Saturday, January 4, 2014

किताब मेरे दोस्त


किताबो के भीतर
मेरे सपनो की दुनिया
बसी है
पन्ना बदलते ही बचपन दिखा
पुरानें दोस्त मिले
ख़ुशी,उमंग,झूठे ओर सच्चे
बातो की कहानी मिली

स्कूल की डेस्क पर
कॉलेज के दिनों के तस्वीर
मिले

एक पुरानी किताब
के पन्नो में दबा प्यार मिला
गुलाब की पंखुडियो पर लिखा
उसका नाम मिला

सपनो को किताबो से प्रेरणा मिली
जिन्दगी का हर रूप किताबो से ढला
ये वो दोस्त है जो रूठे न कभी
अलमारी में बैठे  मुस्कुराते रहे

कहते मुझसे खोजो मुझमे
सवाल दर सवाल
जब कभी किसी नए सवाल
का जवाब मिले
लिखो उसे की बन जाए
एक नई किताब ..

दोस्त पुराने

न जाने कितने दिनों के बाद कुछ दोस्तों से मुलाकात हुई मैं देखती उन्हें छूती उन्हें आँखों से पढ़ती यादों के पन्नों को...