तुम से मुलाकात फिर न
होगी
जिंदगी में लोंग तो आते
रहेगे
पर तेरे-मेरे आँखों में
जो छुपकर होती थी बात
अब किसी ओर के साथ न
होगी
Everyone does have a book in them. Here is few pages of my life, read it through by my stories,poetry and articles.
पढ़ रहा हूँ मैं कागज़ों-बसूदा और नहीं और है का दफ्तर है कोई सोचे तो सोचे कैसे जीएँ सारा दफ्तर ग़मों का दफ्तर है हमसे कोई तो करे इशारा ...
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