तुम से मुलाकात फिर न
होगी
जिंदगी में लोंग तो आते
रहेगे
पर तेरे-मेरे आँखों में
जो छुपकर होती थी बात
अब किसी ओर के साथ न
होगी
Everyone does have a book in them. Here is few pages of my life, read it through by my stories,poetry and articles.
ऐ बेचैन मनो! यह ऐसा शहर है जहाँ लोग खुद ही कई रूपों में जीते हैं। यह बगुलों का शहर है — बाहर से सफ़ेद, भीतर से अलग। धरती धूल से भरी है, ...
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