Sunday, November 29, 2015

सुन्दरता

चाहे कितना भी भर लो
अपनी सोच से ज्यदा
पहुँच से ऊपर

ढेर लगा लो पैसे का
जाल बिछा लो रिस्तो का
जितना हो सके खरीद लो
छल लो किसी को प्यार के नाम से

खुद को बंद कर लो
खुशी नाम के संदूक में
चाहे कुछ भी कर लो
जीत नहीं पाओगे
भीतर के सूनेपन को

आकाश से कम है तुम्हारे पास
न कोई मुकाबला, न कोई मेल
अनगिनत तारे, सूरज, गृह
आकाश गंगा और हजारो लोग

सब भरा पड़ा है
फिर भी खाली दिखता है
सुना नज़र आता है
गुमसुम हो कर भी सुन्दर दिखता है

आकाश सिर्फ अपने आप को सुनता है
कभी खुद को सुनो
खालीपन के सुन्दरता को देख
 सकेगो

Rinki

No comments:

Post a Comment

Thanks for visiting My Blog. Do Share your view and idea.

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम संसोधन 2020 ने करोड़ो को किया बेरोजगार

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम में सरकार ने सितम्बर के माह में रातों-रात संशोधन कर दिया। जिसके परिणाम स्वरुप करोडो लोग बेरोजगार हो गए। संस...