Friday, July 22, 2016

ख़ामोशी प्यार की

ख़ामोशी भी एक तरीका का सहमति है
मैं चुप रहकर तेरे जाने को रोक न सका

मजबूरी का रोना हम दोनो ने रोया
तुम मुझसे दूर जाने के बहाने
को समझा नहीं सके
मैं तेरे सही बातो को भी न
समझ सका

हम थे तो आमने –सामने
लेकिन ख़ामोशी की एक खाई सी
हमारे बीच पट्टी थी

एक सवाल
कभी जो कानो में शौर करता
क्या प्यार नहीं है?
और हम दोनों के दरमियाँ
फिर एक लंबी ख़ामोशी

हमेशा के लिए छा गई

रिंकी राउत

दोस्त पुराने

न जाने कितने दिनों के बाद कुछ दोस्तों से मुलाकात हुई मैं देखती उन्हें छूती उन्हें आँखों से पढ़ती यादों के पन्नों को...