खुद को मिटा कर जीना, ये मोहब्बत नहीं होती साकी,
अपनी ही परछाई से डरना, ये चाहत नहीं होती साकी,
जिसको चाहो दिल से चाहो, मगर खुद को न भूल जाना,
वरना ये उल्फ़त भी, इक आदत बन जाती है साकी।
किसी के इंतज़ार में, उमर गुज़ार देना आसान नहीं साकी,
पर खुद को भी वक़्त देना, ये कोई गुनाह नहीं साकी,
जो तुम्हारे बिना चल सके, उसे चलने दो ख़ुशी से,
तुम्हारा वजूद किसी के जाने से, कम नहीं साकी।
गिरना सबके नसीब में है, पर सम्भलना भी ज़रूरी है साकी,
खुद को धूल बनाने से पहले, खुद की क़ीमत समझो साकी,
जो लोग तुम्हारी एहमियत न समझें, उनके पीछे क्या भागना,
अपनी क़द्र खुद करो, किसी का मोहताज नहीं साकी।
इश्क़ करो दिल खोल कर, पर अपनी शान न गँवाओ साकी,
ख़्वाबों में खो जाओ, मगर होश न भुलाओ साकी,
जिसे जाना है उसे जाने दो, ये ज़िंदगी का दस्तूर है,
जो तुमसे वफ़ा करे वही, तुम्हारा सच्चा सहारा है साकी।
Rinki
बहुत सुंदर
ReplyDeleteजब तक ख़ुद है यानि अहंकार है तब तक तो प्रेम हुआ ही नहीं, स्वाभिमान की बात और है
ReplyDeleteBilkul sahi
ReplyDeleteतुम्हारा वजूद किसी के जाने से कम नहीं साकी...बेहतरीन।
ReplyDeleteWahhh ❤️
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteसुंदर
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteधन्यवाद
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