Tuesday, July 7, 2026

सूफी- कागा कागा रे

 कागा कागा रे

मोरी अरज तोसे

चुन चुन खइयो मास

कागा कागा रे


मोरी अरज तोसे

चुन चुना खाइयोमाच

अरजिया रे खाइयाँ ना तू नैना मोरे

खाइयाँ ना तू नैना मोहे


पिया के मिलन की

आस खाइयो ना तू नैना

मोहे पिया के मिलन की आस

खाइयो ना तू नैना मोरे खाइयो ना तू नैना मो रे बाकी की पूरी बॉडी खा ले लेकिन मेरे नैना मत खाना क्योंकि मुझे पिया के मिलन की आस हैं ,मुझे आस है, उम्मीद है कि मेरा पिया मुझसे मिलने आएगा और उस टाइम में उसका दीदार कर सकूं इसके लिए मुझे अपनी आंखें चाहिए और यहां पे पिया मतलब कोई गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड की बात नहीं चल रही है ये लाइंस ओरिजनली लिखी थी बाबा फरीद ने जो एक पंजाबी सूफी थे उनकी कुछ लाइन गुरु ग्रंथ साहिब में भी लिखी गई हैं,तो उसने लिखा था कि कागा सब तन खाइयो चुनचुन खाइयो मास दो नैनों को मत खाइयो पिया मिलन की आस सूफिज्म में पिया मतलब ईश्वर रब अल्लाह खुदा को बोला जाता है जैसे हम बोलते हैं ना पिया हाजी अली पिया हाजी अली तो इन लाइंस में भी उसी पिया का जिक्र है उसके दीदार की बात कर रही है कि भले ही मैं मर जाऊं मेरी पूरी बॉडी खा ले लेकिन आंखें मत खाना हो सकता है कि मरने के बाद जब वो मेरे सामने आए तो मैं उसका दीदार कर सकूं इसलिए मेरी आंखें छोड़ देना।

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