Monday, August 3, 2026

मैं अधूरे इश्क़ की दरगाह पर नहीं झुकती

 

तेरी मोहब्बत अगर
पूरी इबादत नहीं,
तो मैं उस सजदे से उठ जाती हूँ।

क्योंकि आधा प्रेम
ख़ुदा तक नहीं पहुँचता,
वो बस दिल को
थका देता है।

तुझसे जुदा होना
कोई हार नहीं,
ये तो मेरी रूह का
वुज़ू है।
तेरे पास रहकर
खुद को गँवा देना—
ये इश्क़ नहीं,
ये ग़फ़लत है।

मुझे वो आग चाहिए
जो जला कर ख़ाली करे,
वो नहीं
जो सुलगाकर
राख में बाँध दे।

अगर तू मुकम्मल नहीं,
तो मेरा दूर जाना ही
मेरी इबादत है।
क्योंकि अधूरा इश्क़
रूह को
टुकड़ों में बाँट देता है।

तेरा न होना
मेरे आधा होने से बेहतर है।
ख़ाली होना
टूटने से बेहतर है।

मैं ख़ुद को
उस ख़ामोशी में सौंपती हूँ
जहाँ कोई नाम नहीं,
कोई दावा नहीं—
सिर्फ़ सच है।

और सच ये है—
जो प्रेम मुझे ख़ुदा तक न ले जाए,
उसे मैं
इश्क़ नहीं कहती।

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मैं अधूरे इश्क़ की दरगाह पर नहीं झुकती

  तेरी मोहब्बत अगर पूरी इबादत नहीं , तो मैं उस सजदे से उठ जाती हूँ। क्योंकि आधा प्रेम ख़ुदा तक नहीं पहुँचता , वो बस दिल को थका देता ह...