मेरे धागे लौटा दो, माधव
1.
मेरे धागे लौटा दो माधव,
मेरी मन्नत अधूरी रह गई,
जिस आस में बाँधा था धागा,
वो आस कहीं दूर बह गई।
तेरे द्वार पर सिर झुकाकर,
सबसे छुपकर रोया था,
मन की सारी पीड़ा लेकर,
बस तुझसे ही कुछ माँगा था।
जो माँगा था दिल ने तुझसे,
वो सपना अधूरा रह गया
2.
मैं अपने धागे वापस नहीं लूंगी माधव।
मेरा एक कर्ज तुम्हारे भी सर हमेशा रहेगा।
तुम्हारे दर से भी कोई खाली हाथ आता है,
यह कलंक तुमको भी सहना पड़ेगी।
मेरा एक कर्ज तुम्हारे भी सर हमेशा रहेगा।
तुम्हारे दर से भी कोई खाली हाथ आता है,
यह कलंक तुमको भी सहना पड़ेगी।
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