न साथ तेरा
ये हमेश की दूरी
ख़ामोशी मेरी।
खाली कमरा
साथ-बात अधूरी
मज़बूरी तेरी।
तड़पता मैं
सिसकती रही तू
बेबस हम।
टूटे सपने
आज़ाद हुआ तू
ज़िद्दी ज़िन्दगी।
रिंकी
Everyone does have a book in them. Here is few pages of my life, read it through by my stories,poetry and articles.
ऐ बेचैन मनो! यह ऐसा शहर है जहाँ लोग खुद ही कई रूपों में जीते हैं। यह बगुलों का शहर है — बाहर से सफ़ेद, भीतर से अलग। धरती धूल से भरी है, ...
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