न साथ तेरा
ये हमेश की दूरी
ख़ामोशी मेरी।
खाली कमरा
साथ-बात अधूरी
मज़बूरी तेरी।
तड़पता मैं
सिसकती रही तू
बेबस हम।
टूटे सपने
आज़ाद हुआ तू
ज़िद्दी ज़िन्दगी।
रिंकी
Everyone does have a book in them. Here is few pages of my life, read it through by my stories,poetry and articles.
पढ़ रहा हूँ मैं कागज़ों-बसूदा और नहीं और है का दफ्तर है कोई सोचे तो सोचे कैसे जीएँ सारा दफ्तर ग़मों का दफ्तर है हमसे कोई तो करे इशारा ...
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