Tuesday, September 1, 2026

रब की तलाश

पहला कदम था प्यार का,

दिल में जागी एक चाहत,

किसी का नाम मालूम न था,

बस मन में थी तड़प-इबादत।

फिर पास आने की आरज़ू जगी,

 याद में मिलने लगा सुकून,

 जब भी उससे दूर हुए,

 बेचैन हुआ मन, बढ़ा जुनून।

 

फिर ऐसा प्यार हुआ गहरा,

 कि खुद को हम भूल गए,

 जिसे चाहा, उसी में खोकर,

हर तरफ़ बस वही पाए।

 

फिर धीरे-धीरे "मैं" मिटने लगा,

 अहम का वजूद गुम हो गया, जो बचा,

 वो सिर्फ़ वही था,

हर कतरा उसी में समा गया।

फिर आई वो मिलन की घड़ी,

 जिसे ढूँढा था हर राह-गुज़र,

 वो तो सदा ही पास खड़ा था,

 अपनी हर साँस के अंदर।

 

उस अद्भुत मिलन को देखकर,

हैरान खड़ी रह गई नज़र,

कोई शब्द न बयाँ कर पाया,

सब समझ से परे था वो मंज़र।

 

आख़िर में मन शांत हो गया,

सदा के लिए उसी में बस गया,

 खुद को मिटाकर सब कुछ पाया,

सच्चा रब प्यार में मिल गया।

 Rinki 

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रब की तलाश

पहला कदम था प्यार का , दिल में जागी एक चाहत , किसी का नाम मालूम न था , बस मन में थी तड़प-इबादत। फिर पास आने की आरज़ू जगी ,   याद म...