जब मैं अपने अंतिम शब्द लिखूँगी…
तब रिश्तों को बेड़ियाँ,
प्रेम को पाखंड,
सुख को झूठ,
और दुख को साथी लिखूँगी।
परमेश्वर को धोखा,
पैसों को प्रेमी,
और अपनी तन्हाई को
अपना सच लिखूँगी।
जिन्होंने कहा था—
“तुम्हारे बिना जी नहीं पाएँगे,”
उन्हें अपनी कहानी का
एक अधूरा अध्याय लिखूँगी।
जिन्होंने मुझे बाँधकर
इसे प्रेम कहा था,
उनके हर वादे को
एक भ्रम लिखूँगी।
और अंत में,
न किसी से शिकायत होगी,
न किसी से कोई सवाल—
बस अपने नाम के आगे
एक आख़िरी शब्द लिखूँगी…
मुक्ति।