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Monday, April 13, 2026

जो जीते हैं, वही-न-ख़ुद का दफ्तर है मुश्किल में कहीं का दफ्तर है-जौन एलिया

 पढ़ रहा हूँ मैं कागज़ों-बसूदा

और नहीं और है का दफ्तर है

कोई सोचे तो सोचे कैसे जीएँ
सारा दफ्तर ग़मों का दफ्तर है

हमसे कोई तो करे इशारा
कि ज़मीं, आसमाँ का दफ्तर है

हुए तालों-जैसे-जैसे जीएँ
वक्त, जिस्म और जाँ का दफ्तर है

जो जो दफ्तर है आसमानी तरह
वो मियाँ जी यहाँ का दफ्तर है

जो हक़ीक़त है, हम उसे क्यों ढूँढ़ें
वो तो इन बातों का दफ्तर है

जो रहा है ज़िंदगी भर का हिसाब
वो अदाओं का दफ्तर है

रब की तलाश

पहला कदम था प्यार का , दिल में जागी एक चाहत , किसी का नाम मालूम न था , बस मन में थी तड़प-इबादत। फिर पास आने की आरज़ू जगी ,   याद म...