Thursday, November 25, 2021

दिन कुछ ऐसे गुजारता है कोई - गुलजार

 दिन कुछ ऐसे गुजारता है कोई

जैसे एहसान उतारता है कोई

आईना देख के तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई

पक गया है शजर पे फल शायद
फिर से पत्थर उछालता है कोई

फिर नजर में लहू के छींटे हैं
तुम को शायद मुघालता है कोई

देर से गूँजतें हैं सन्नाटे
जैसे हम को पुकारता है कोई ।

Monday, September 13, 2021

सिगरेट-- अमृता प्रीतम

 यह आग की बात है

तूने यह बात सुनाई है
यह ज़िंदगी की वो ही सिगरेट है
जो तूने कभी सुलगाई थी

चिंगारी तूने दे थी
यह दिल सदा जलता रहा
वक़्त कलम पकड़ कर
कोई हिसाब लिखता रहा

चौदह मिनिट हुए हैं
इसका ख़ाता देखो
चौदह साल ही हैं
इस कलम से पूछो

मेरे इस जिस्म में
तेरा साँस चलता रहा
धरती गवाही देगी
धुआं निकलता रहा

उमर की सिगरेट जल गयी
मेरे इश्के की महक
कुछ तेरी सान्सों में
कुछ हवा में मिल गयी,

देखो यह आखरी टुकड़ा है
ऊँगलीयों में से छोड़ दो
कही मेरे इश्कुए की आँच
तुम्हारी ऊँगली ना छू ले

ज़िंदगी का अब गम नही
इस आग को संभाल ले
तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ
अब और सिगरेट जला ले !!

Sunday, July 4, 2021

जब ख़ुदा से लव लगाई जाएगी- sanjar gazipuri

 जब ख़ुदा से लो लगाई जाएगी

फिर दुआ कब कोई ख़ाली जाएगी

ताकते हैं दिल वो मेरा बार बार

क्या कोई हसरत निकाली जाएगी

आँख मिलते ही किसी मा'शूक़ से

फिर तबीअ'त क्या सँभाली जाएगी

गर कभी चमकेगी वो बर्क़-ए-जमाल

आँख फिर कब उस पे डाली जाएगी

हाय कब होगा उन्हें मेरा ख़याल

आह बेकस की ख़ाली जाएगी

छोड़िए अब शर्म ये फ़रमाइए

हसरत दिल की कब निकाली जाएगी

सोंंच कर ये उन को छेड़ा हम ने आज

मुँह से उन के कुछ दुआ ली जाएगी

कम-सिनी की ज़िद जवानी में भी है

इन की कब ये ख़ुर्द-साली जाएगी

सख़्त-जाँ 'संजर' हुआ है इश्क़ में

तेग़ अब क़ातिल की ख़ाली जाएगी

आप सभी पाठक मित्रो के सहयोग से मेरी काव्य संकलन की पुस्तक " उड़ान " प्रकाशित हो गई है।  आप सब का हार्दिक धन्यवाद।



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रब की तलाश

पहला कदम था प्यार का , दिल में जागी एक चाहत , किसी का नाम मालूम न था , बस मन में थी तड़प-इबादत। फिर पास आने की आरज़ू जगी ,   याद म...