Thursday, January 4, 2018

असली–नकली


पकड़ो-पकड़ो, चोर–चोर उस औरत के गले का चैन खींच रहा है पकड़ो उसे, माता जी आप ठीक तो है ना I अरे खींच क्यूँ रहा है ले मैं ही इसे उतार कर दे देती, लेता जा माता जी आप ये क्या कहा रही है?

अरे बेटा नकली है, वो जोर से चिल्लाई लेता जा नकली माल,  आगे जा कर उस बाइक सवार से चैन फ़ेक दी, औरत ने दौड़ कर चैन उठा लिया और फिर अपने गले में पहन लिया, अरे माता जी आप क्यूँ परेशान होती है नकली चैन के लिए
वो बोली, तुझे क्या मैं पागल देखती हूँ? जो नकली सोने की चैन पहनुगीI



वो देर तक सोचता रहा नकली और असली के बारे में....




रिंकी

No comments:

Post a Comment

Thanks for visiting My Blog. Do Share your view and idea.

A Symphony of Regret

I left the lights on in the hallway floor... Silently rehearsing what I'll never get to say. The clock on the wall is ticking too loud...