अहमद फ़राज़

 एक दिन ऐसा हुआ, वफ़ा पर बहस छिड़ गई। मैंने इश्क़ को अमर कहा, वो मेरी ज़िद से नाराज़ हो गई। मैं इश्क़ का क़ैदी था, वो इश्क़ को एक क़ैदख...