सोचा न था की दर्द
इतना गहरा होगा।
हर इंसान शिकन के
अँधेरे में सिहरा होगा।
दोस्तों को खोने के
बाद अलविदा कहना
न नसीब होगा।
इंसान इस कदर
इन्सानित से फ़ना होगा।
तबाही होगी ऐसी कभी
सोचा न था
मौत का पहरा हर गली
मोहल्ला और घर पर
होगा।
साँस को मोहताज़ होगी
सांसे
देश में मातम पसरा
होगा।
सोचा न था की दर्द
इतना गहरा होगा।
हर इंसान शिकन के
अँधेरे में सिहरा होगा।
Rinki
