Sunday, September 10, 2017

इस प्यार ने




तेरा क्या खोया, मेरे क्या गया?

इस प्यार ने जब सारी खुदाई ठग ली


जब किसी ने किस को प्यार से देखा

समझो प्यार ने उनसे उनकी ज़िन्दगी की
सारी कमाई ठग ली

Monday, August 7, 2017

वामनावतार रक्षाबंधन पौराणिक कथा

एक सौ 100 यज्ञ पूर्ण कर लेने पर दानवेन्द्र राजा बलि के मन में स्वर्ग का प्राप्ति की इच्छा बलवती हो गई तो का सिंहासन डोलने लगा। इन्द्र आदि देवताओं ने भगवान विष्णु से रक्षा की प्रार्थना की। भगवान ने वामन अवतार लेकर ब्राह्मण का वेष धारण कर लिया और राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुँच गए। उन्होंने बलि से तीन पग भूमि भिक्षा में मांग ली।
बलि के गु्रु शुक्रदेव ने ब्राह्मण रुप धारण किए हुए विष्णु को पहचान लिया और बलि को इस बारे में सावधान कर दिया किंतु दानवेन्द्र राजा बलि अपने वचन से न फिरे और तीन पग भूमि दान कर दी।
वामन रूप में भगवान ने एक पग में स्वर्ग और दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लिया। तीसरा पैर कहाँ रखें? बलि के सामने संकट उत्पन्न हो गया। यदि वह अपना वचन नहीं निभाता तो अधर्म होता। आखिरकार उसने अपना सिर भगवान के आगे कर दिया और कहा तीसरा पग आप मेरे सिर पर रख दीजिए। वामन भगवान ने वैसा ही किया। पैर रखते ही वह रसातल लोक में पहुँच गया।
जब बलि रसातल में चला गया तब बलि ने अपनी भक्ति के बल से भगवान को रात-दिन अपने सामने रहने का वचन ले लिया और भगवान विष्णु को उनका द्वारपाल बनना पड़ा। भगवान के रसातल निवास से परेशान लक्ष्मी जी ने सोचा कि यदि स्वामी रसातल में द्वारपाल बन कर निवास करेंगे तो बैकुंठ लोक का क्या होगा? इस समस्या के समाधान के लिए लक्ष्मी जी को नारद जी ने एक उपाय सुझाया। लक्ष्मी जी ने राजा बलि के पास जाकर उसे रक्षाबन्धन बांधकर अपना भाई बनाया और उपहार स्वरुप अपने पति भगवान विष्णु को अपने साथ ले आयीं। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी यथा रक्षा-बंधन मनाया जाने लगा।


भविष्य पुराण की एक कथा के अनुसार  एक बार देवता और दैत्यों  (दानवों ) में बारह वर्षों तक युद्ध हुआ परन्तु देवता विजयी नहीं हुए। इंद्र हार के भय से दु:खी होकर  देवगुरु बृहस्पति के पास विमर्श हेतु गए। गुरु बृहस्पति के सुझाव पर इंद्र की पत्नी महारानी शची ने श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन विधि-विधान से व्रत  करके रक्षासूत्र   तैयार किए और  स्वास्तिवाचन के साथ ब्राह्मण की उपस्थिति में  इंद्राणी ने वह सूत्र  इंद्र की  दाहिनी कलाई में बांधा  जिसके फलस्वरुप इन्द्र सहित समस्त देवताओं की दानवों पर विजय हुई।


महाभारत में ही रक्षाबंधन से संबंधित कृष्ण और द्रौपदी का एक और वृत्तांत मिलता है। जब कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी में चोट आ गई। द्रौपदी ने उस समय अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उँगली पर पट्टी बाँध दी। यह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था।








Source:-   https://www.bharatdarshan.co.nz/article-details/532/raksha-bandhan-history-stories.html

Monday, July 31, 2017

ख़त इन्सान के नाम


 
हे  पर्थ
याद रख ये बात
करता भी तू है
भरता भी तू है
भोगता भी तू है

मैं तो शुन्य हूँ
जिसे समझ पाना
तेरे बस की बात नहीं

तू काटे पेड़
दूषित करे जल
उजड़े धरती अपनी
जला दी तूने धरती सारी

और पूछाता है
मुझसे तू  की, मैं कहाँ हूँ

प्रकृति अपने नियम
से चलती है
बरसती, जलती,हवा हो तेज़ उडती

 तू  चाहता है प्रकृति को काबू करना
अगर वो संतुलन बनाने की लिए
रूद्र हो जाए

तो तू कहता है
इश्वर तू ने क्या किया

एक बात मैं फिर कहता हूँ
करता भी तू है
भरता भी तू है
भोगता भी तू है

रिंकी
 


Thursday, July 27, 2017

अच्छी दुल्हन


नई नवेली दुल्हन जब उसके जिंदगी में आई तो उसकी दुनिया स्वर्ग सी हो गईI वो बस उसको निहारता रहता और मन में हो रही गुदगुदी को छुपाते हुए मुस्कुरा देताI हर बात पर कहता मुझे बहुत अच्छी दुल्हन मिली है, अब साल होने को आया है, वो अपनी दुल्हन के साथ बहुत खुश हैI उनकी दुल्हन कुछ दिनों से परेशान सी दिखाई दे रही है,उसने कई बार कारण पता करने की कोशिश की पर दुल्हन चुप रहीI और एक दिन उसने कहा की उसकी आँखों और सर में दर्द  हैI
वो उसे डॉक्टर से चेक-उप करने ले गया I डॉक्टर ने दुल्हन से पूछा आपने चश्मा लगाना क्यूँ छोड़ दिया?

आपकी आँखों की रोशनी पर बहुत असर पड़ रहा है, दवाइयां और चश्मा लेने के बाद दोनों घर आए
उसने पूछा तुमने चश्मे वाली बात क्यूँ छुपाई? उसकी दुल्हन ने रोते हुए कहा,मुझसे माँ ने कहा था की किसी को मत बताना नहीं तो लोग तुझे अच्छी दुल्हन नहीं कहेंगेI

Friday, July 21, 2017

सौ में सतर आदमी


सौ में सतर आदमी...

सौ में सतर आदमी
पिलहाल जब नाशाद है
दिल पे  रखकर हाँथ कहिये
देश क्या आज़ाद है

कोठीयों से मुल्क की
मायर को मत अंकिये
असली हिंदुस्तान तो
फूटपाथ पर आबाद  है

सताधारी लड़ पड़े है
आज कुतो की तरह
सुखी रोटी देखकर
हम मुफलिसों के हाँथ में

जिस शहर के मुन्तजिम
अन्धे हो जल्वागाहा के
उस शहर में रोशनी की
बात बेबुनियाद है

जो उलझ कर रह गई है
फ़ाइल के जाल में
रोशनी  वो गाँव तक
पहुचेगी कितने साल में

सौ में सतर आदमी


 लेखक -अदम गोंडवी

रब की तलाश

पहला कदम था प्यार का , दिल में जागी एक चाहत , किसी का नाम मालूम न था , बस मन में थी तड़प-इबादत। फिर पास आने की आरज़ू जगी ,   याद म...