Sunday, July 17, 2022

तेरे ख़ुशबू में बसे ख़त- राजेन्द्र नाथ रहबर

 तेरे ख़ुशबू में बसे ख़त, मैं जलाता कैसे


प्यार में डूबे हुए ख़त, मैं जलाता कैसे
तेरे हाथों के लिखे ख़त, मैं जलाता कैसे

जिनको दुनिया की निगाहों से छुपाये रखा
जिनको इक उम्र कलेजे से लगाये रखा
दीन जिनको, जिन्हें ईमान बनाये रखा

जिनका हर लफ़्ज़ मुझे याद था पानी की तरह
याद थे मुझको जो पैग़ाम-ए-ज़ुबानी की तरह
मुझको प्यारे थे जो अनमोल निशानी की तरह

तूने दुनिया की निगाहों से जो बचकर लिखे
साल-हा-साल मेरे नाम बराबर लिखे
कभी दिन में तो कभी रात को उठ कर लिखे

तेरे ख़त आज मैं गंगा में बहा आया हूँ
आग बहते हुए पानी में लगा आया हूँ

Monday, May 23, 2022

कबूतर -बाज़ी

एक लड़ाई बिना आवाज़ की। 

लड़ाई बिना किसी संघर्ष  की। 

न अभिवयक्ति और न ही आज़ादी। 

बोलने की या कोई विचार सुने जाने की। 


एक लड़ाई  सिर्फ दिखावे की। 

चुप रहके सत्ता को मज़बूत करने की 

शोर करके  जनता को झूठा  विश्वास। 

उम्मीद और नशे को बनाए 

रखने की। 


रिंकी 

Saturday, February 19, 2022

कभी सोचा है

 क्यों आग से खेलते है?

जब हाँथ को जलना ही है

क्यों हम किसी के आगे -पीछे घूमते है?

जब अकेले ही सफर में है

क्यों हम दर्द को सहते हुए भी किसी

के साथ रहने चाहे

जब पता है की दुसरो में ख़ुशी देखना

बेमानी ही है।

 

दिन में परछाई क्यों ढूँढ़ते हो ?

जब रात में साया भी घूम है

पुराने रास्तो के साथ -साथ

चलना ही क्यों है ?

जब पता है की वो, पुराने

मंज़िल तक ही लेकर जाते है।

 

कभी सोचा है क्या ?

तुम्हारी सोच भी अपनी है क्या?

जो तुम देख रहो हो खुली आँखों से

हकीकत और धोके में फर्क

देखते हो क्या ?

क्यों सब जैसा बनाना है

अपने जैसा बनाना बुरा है क्या ?

 

पिंजरा उम्मीदों का है

सपनो को खोना का है

अकेले होने का  है।

सोचा कभी है क्या ,

यही सच है क्या?

 

क्या कभी अपने पंख देखा है?

उड़ते हुए महसूस किया है

कभी खुद को भी तलाशा है?

अपने भीतर भी कभी झाँका है क्या?

सोचा कभी है क्या ,

यही सच है क्या?

 

 

रिंकी

Thursday, February 3, 2022

एक अकेला दिल

चांदनी रात

कॉफ़ी के साथ तुम्हारी बात 

एक रोमांटिक लांग ड्राइव

कंबल में लिपटे के साथ

एक अकेला दिल

कुछ ऐसी  ही हसरत के साथ।

 


कोई  खुद से भी खास

दोस्त से बढ़ कर

अपना हो जैसा

सिहरन भरी सर्दी में

धुप की गर्माहट का एहसास।

एक अकेला दिल

कुछ ऐसी ही हसरत के साथ।

 

कुछ पुराने  किस्से

टूटा हुआ वादा

कल की यादो  से डरा

खुद में ही छुपा

दर्द से गुजरने को फिर से तैयार

एक अकेला दिल

कुछ ऐसी ही हसरत के साथ। 

 

 

दिल के सफर में

मेरा वादा है

एक अविस्मरणीय पल का

दो अलग शख्स के एक साथ का

कुछ ऐसी ही हसरत के साथ

एक अकेला दिल।

 

रिंकी

 

रब की तलाश

पहला कदम था प्यार का , दिल में जागी एक चाहत , किसी का नाम मालूम न था , बस मन में थी तड़प-इबादत। फिर पास आने की आरज़ू जगी ,   याद म...