Wednesday, March 31, 2021

ख़ुद अपनी ही हर आहट पर- मजाज़ लखनवी

 

ख़ुद अपनी ही हर आहट पर

दिल धड़क उठता है ख़ुद अपनी ही हर आहट पर
अब क़दम मंज़िल-ए-जानाँ से बहुत दूर नहीं

दफ़्न कर सकता हूं सीने में तुम्हारे राज़ को
और तुम चाहो तो अफ़्साना बना सकता हूं मैं

वो मुझको चाहती है, और मुझ तक आ नहीं सकती
मैं उसको पूजता हूं, और उसको पा नहीं सकता

Monday, January 4, 2021

लाल रंग -रंजना कुमारी

 मेरी सलवार पर पड़ी वो खून की छींटे मानो 

मुझे बतला रही थी,

कुछ भी पहले जैसा रहा नहीं।

एहसास मुझे करा रही थी। 

अंदर ही अंदर घबरा रही थी। 

बहुत तेज़ थी पीड़ा,

मेरे भीतर जो सहि ना जा रही थी। 

रोना मैं जोरो से चाहती थी,

माँ मुझे चुप करा रही थी। 

चुप चिल्ला मत पापा है घर में 


ऐसा कहकर मुझे चुप करा रही थी। 

कमरे के कोने में पड़ी दबी आवाज़ में 

सिसके जा रही थी। 

मेरी सलवार पर पड़ी वो खून की छींटे मानो 

मुझे बतला रही थी,

कुछ भी पहले जैसा रहा नहीं।


रंजना कुमारी 


Sunday, December 27, 2020

साल मुबारक! / अमृता प्रीतम

 जैसे सोच की कंघी में से

एक दंदा टूट गया
जैसे समझ के कुर्ते का
एक चीथड़ा उड़ गया
जैसे आस्था की आँखों में
एक तिनका चुभ गया
नींद ने जैसे अपने हाथों में
सपने का जलता कोयला पकड़ लिया
नया साल कुझ ऐसे आया...

जैसे दिल के फ़िक़रे से
एक अक्षर बुझ गया
जैसे विश्वास के काग़ज़ पर
सियाही गिर गयी
जैसे समय के होंटो से
एक गहरी साँस निकल गयी
और आदमज़ात की आँखों में
जैसे एक आँसू भर आया
नया साल कुछ ऐसे आया...

जैसे इश्क़ की ज़बान पर
एक छाला उठ आया
सभ्यता की बाँहों में से
एक चूड़ी टूट गयी
इतिहास की अंगूठी में से
एक नीलम गिर गया
और जैसे धरती ने आसमान का
एक बड़ा उदास-सा ख़त पढ़ा
नया साल कुछ ऐसे आया...

Tuesday, December 8, 2020

पाश : ...तो हमें देश की सुरक्षा से ख़तरा है

 यदि देश की सुरक्षा यही होती है

कि बिना ज़मीर होना ज़िन्दगी के लिए शर्त बन जाए
आँख की पुतली में 'हाँ' के सिवाय कोई भी शब्द
अश्लील हो
और मन बदकार पलों के सामने दण्डवत झुका रहे
तो हमें देश की सुरक्षा से ख़तरा है

हम तो देश को समझे थे घर-जैसी पवित्र चीज़
जिसमें उमस नहीं होती
आदमी बरसते मेंह की गूँज की तरह गलियों में बहता है
गेहूँ की बालियों की तरह खेतों में झूमता है
और आसमान की विशालता को अर्थ देता है

हम तो देश को समझे थे आलिंगन-जैसे एक एहसास का नाम
हम तो देश को समझते थे काम-जैसा कोई नशा
हम तो देश को समझते थे क़ुर्बानी-सी वफ़ा
लेकिन 'गर देश
आत्मा की बेगार का कोई कारख़ाना है
'गर देश उल्लू बनने की प्रयोगशाला है
तो हमें उससे ख़तरा है

'गर देश का अमन ऐसा होता है
कि क़र्ज़ के पहाड़ों से फिसलते पत्थरों की तरह
टूटता रहे अस्तित्व हमारा
और तनख़्वाहों के मुँह पर थूकती रहे
क़ीमतों की बेशर्म हँसी
कि अपने रक्त में नहाना ही तीर्थ का पुण्य हो
तो हमें अमन से ख़तरा है

'गर देश की सुरक्षा ऐसी होती है
कि हर हड़ताल को कुचल कर अमन को रंग चढ़ेगा
कि वीरता बस सरहदों पर मर कर परवान चढ़ेगी
कला का फूल बस राजा की खिड़की में ही खिलेगा
अक़्ल, हुक्म के कुएँ पर रहट की तरह ही धरती सींचेगी
तो हमें देश की सुरक्षा से ख़तरा है। 

- पाश 

Sunday, November 1, 2020

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम संसोधन 2020 ने करोड़ो को किया बेरोजगार

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम में सरकार ने सितम्बर के माह में रातों-रात संशोधन कर दिया। जिसके परिणाम स्वरुप करोडो लोग बेरोजगार हो गए। संस्थाएँ जो बड़ी संस्थाओ से दान की राशि को प्राप्त कर स्थानीय लोगो को उनके ही गांव -शहर में रोज़गार देते थे, सरकार के आदेश के अनुसार अब बड़ी संस्थाएँ जो FCRA की धन राशि दान के रूप में दूसरी संस्था को देते थे अब नहीं दे सकते। जिसके परिणाम स्वरुप करोडो लोग बेरोजगार हो गए। इस आदेश को तत्काल में लागू कर दिया गया है। इसे ऐसे समझते है आप ऐसी संस्था में काम करते है जिसे दूसरी बड़ी संस्था विदेश से प्राप्त चंदा को दान के रूप में देती है। आज रात को सरकार ने एक आदेश जारी किया की सभी FCRA की धन राशि से चलाए जानेवाले योजना बंद। सुबह जब आप जागते है तो पता चलता है की आप की संस्था अब परियोजना नहीं चला सकती। इसका मतलब अब आपकी भी जरूरत नहीं है।

तीन प्रमुख संशोधन किए गए है। पहला संशोधन, संस्था जिसके पास विदेश से प्राप्त धन राशि  है या कहें FCRA  की विदेशी अंशदान प्राप्त है वो किसी भी दूसरी संस्था को वो राशि नहीं दे सकती। दूसरा संशोधन, कोई भी सरकारी कर्मचारी या सरकारी योजना-परियोजना से जुड़ा  व्यक्ति FCRA के तहत विदेशी अंशदान नहीं ले सकते है। तीसरा संशोधन, अब 80 : 20 का अनुपात का पालन करना होगा। विस्तार से समझे तो 80 प्रतिशत योजना के उदेश्य को प्राप्त करने के लिए और 20 प्रतिशत प्रशासनिक कार्य के लिए। पहले झलक में सरकार का कदम उचित जान पड़ता है  पहले समझते है की FCRA क्या है?  विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम – FCRA जिसके तहत कोई समाज सेवी संस्था या एनजीओ विदेशों से वित्तीय सहयोग या अनुदान ले सकता हैं । ये अनुदान सामजिक कार्य और राष्ट्र हित में ही प्रयोग होना चाहिए विदेशी वित्तीय सहयोग या अनुदान किसी भी प्रकार राष्ट्र के लिए हानिकारक हो या किसी गलत या संदिग्ध गतिविधि के लिए लेना निषिद्ध हैं

अधिनियम के संशोधन के पक्ष में कहने वाले का तर्क है की इससे सरकार विदेशी अनुदान के उपयोग पर नज़र रख सकेगी। राशि का इस्तमाल अराजकतत्व जैसे सरकार के विरोध में आंदोलन,धरना और प्रदर्शन जैसे कार्य में नहीं हो इस पर नज़र रखी जा सकती है। । नक्सल, धर्म परिवर्तन जैसे घटना में कमी होगी। सरकार का कहना है की राशि का उपयोग देश विरोधी गतिविधियों में नहीं होगा। सरकार विदेशी वित्तीय सहयोग का लेखा-जोखा ले सकती हैं भारत में, अभी हाल-ही में बहुत सारे समाज सेवी संस्था को विदेशी फण्ड लेने पर रोक लगा दिया गया था ,ऐसी आशंका थी कि इन वित्तीय अनुदान का गलत उपयोग किया जा रहा हैं  अधिनियम के संशोधन के विपक्ष में तर्क है की हमने "गेहूं के साथ घून पीसना " सुना था पर सरकार ने  इस अधिनियम को रातो-रात बिना किसी चर्चा के पास करके घून को नहीं निकला गेहूँ ही फैक दिया। कोरोना के विकट समय  में जब लोगो के पास रोज़गार के साधन कम है। इस एक अधिनियम के कारण पलभर में ही करोड़ो लोगो की नौकरी चली गई।

लाखो संस्था जो अंतरास्ट्रीय सस्थाओँ से राशि प्राप्त कर देश के दूर दराज गांव में विकास का कार्य करती थी सब बहुत कम हो जाएगा। सबसे अधिक प्रभाव उन युवाओँ पर होगा जिन्हे अपने ही गांव में रोज़गार मिल जाता था। देश की आर्थिक स्तिथि को देखते हुए ऐसा फैसला जनहित के लिए है लगता नहीं है , ये संसोधन सिर्फ सरकार को फ़ायदा देता दिखाई देता है। चाहे किसी भी पार्टी की हो।


Note: This is not a donation appeal; this is an opportunity to encourage Girls like Gayatri to continue her studies.In this campaign envisaged to support children of economical weak families to get enroll in Intermediate session 2021.


 Just click on advertisement, the money will be spending on paying school/college admission fee.

# Support for Education


Rinki


रब की तलाश

पहला कदम था प्यार का , दिल में जागी एक चाहत , किसी का नाम मालूम न था , बस मन में थी तड़प-इबादत। फिर पास आने की आरज़ू जगी ,   याद म...