Sunday, May 19, 2013

गाँव

जब गाँव में पगडण्डी थी पाव सरपट बढ़े थे घर की और आज गाँव में सड़क है पर मुझे गाँव नसीब नहीं...................................

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इसी से पहले अँधेरा मेरे अंदर से ख़त्म कर दे मुझे- Rinki

मेरी रूह के वीरान कमरों में कोई सहर भर दे मुझे। तुम मुझे चाँद की तरह देखो, बेदाग़ न सही मगर अपना, मेरी ख़ामोशियों को लफ़्ज़ दो, मेरी नज़रो...