Thursday, February 6, 2014

नहीं आसन मिटाना तेरी याद ..

समय के गलियारे में
खुबसूरत से याद मारे-मारे
फिरते  है,
सोचा कैद करू सदूक में
पर ये तो
मेरी तरह मलंग
स्वतंत्र लगते है

चुभते बनके शुल
कभी चुभे तो टपके खून
न आंसू बहे, न आह! निकले
खामोशी से मेरी जान निकले

बताना भी मुश्किल
छिपना नहीं आसन
भीतर –भीतर जलाके के
खाक करे मुझे
बुझाना नहीं आसन
कैसे मिटाऊ तेरी याद

नहीं आसन मिटाना तेरी याद ...


Sunday, February 2, 2014

तेरे प्यार में


ये असर है दुआओ का
मेरे आँखों को तेरा दीद हुआ
मेरा दिल तो पहले से घायल था
आज से तेरा मुरीद हुआ

छुप –छुप कर देखना
नसीब में सब के नहीं
जिसे मिली ये दौलत
वोही सूफी फ़क़ीर हुआ

तेरे प्यार में दिल,ऐसा मजबूर हुआ
एक अच्छा इंसान,इस शहर में दीवानों के

नाम से मशहूर हुआ

Rinki 

Saturday, January 25, 2014

Dil ki baat

दिलगी की आरजू तो मुझे भी थी
जब आइने में अपना चेहरा देखा तो
तो जाना मुद्तो हुई अपने आप को पहचाने हुए

सपने देखने तो उनका हक़ है
जिनके महबूब उन पर लूट गए हो

चाहने या न चाहने की दहलीज़ पर
कदम रुक गए है
डर है की दुनिया की
रिवाज मेरे प्यार को न
जला के खाक कर दे

कोई क्या मारे आशिक को
यार का रूठ जाना ही
सौ मौत के बराबर

Saturday, January 18, 2014

वो लड़की

कूड़े के ढेर से बच्चे के
रोने की आवाज़ आई
जैसे वो अपने होने
पर रो रहा हो
लोग इकठा हुए,भीड़ लगी

किसी को दया आई
किसी ने माँ को कलंकनी कहा
समाज के संवेदनहीनता पर
सर झुकाए सब चुप खड़े थे

ये बच्चा मेरे गोद में होता
तो मेरे जीवन सफल होता
ये करुण से भरी आवाज़
एक निसंतान माँ की थी
ममता के वेग में
आगे आ कर  बोली
मैं इसे पालूगी
अपने जीवन का आधार बना लूगी
उसके पति ने सहमती से सर हिलाया

एक नव दम्पति ने ठीक ऐसा
ही दावा किया
उस लावरिस को पाने को अब  दो परिवार
दावेदार थे

इतने शोर में पुलिस आई
सिपाही ने बच्चे को उठाया
कहा, कितनी सुन्दर बच्ची है

पास खड़े दोनों परिवारों ने एक दूसरें
को घूर कर देखा
भीड़ छट गई
अखबरों ओर टी. वी में ख़बर आई

अब वो लड़की किसी अनाथालय
में पड़ी है
इस मतलबी,निर्मम दुनिया से
बिना किसी सवाल-जावाब किए
अपने खाली आँखों में सपने सजाए हुए
ऐसे स्वर्ग की जो कही नहीं है
बस उसकी बाते है..

Saturday, January 4, 2014

किताब मेरे दोस्त


किताबो के भीतर
मेरे सपनो की दुनिया
बसी है
पन्ना बदलते ही बचपन दिखा
पुरानें दोस्त मिले
ख़ुशी,उमंग,झूठे ओर सच्चे
बातो की कहानी मिली

स्कूल की डेस्क पर
कॉलेज के दिनों के तस्वीर
मिले

एक पुरानी किताब
के पन्नो में दबा प्यार मिला
गुलाब की पंखुडियो पर लिखा
उसका नाम मिला

सपनो को किताबो से प्रेरणा मिली
जिन्दगी का हर रूप किताबो से ढला
ये वो दोस्त है जो रूठे न कभी
अलमारी में बैठे  मुस्कुराते रहे

कहते मुझसे खोजो मुझमे
सवाल दर सवाल
जब कभी किसी नए सवाल
का जवाब मिले
लिखो उसे की बन जाए
एक नई किताब ..

रब की तलाश

पहला कदम था प्यार का , दिल में जागी एक चाहत , किसी का नाम मालूम न था , बस मन में थी तड़प-इबादत। फिर पास आने की आरज़ू जगी ,   याद म...