Friday, April 25, 2014

आँखों से बात

तुम से मुलाकात फिर न होगी
जिंदगी में लोंग तो आते रहेगे
पर तेरे-मेरे आँखों में
जो छुपकर होती थी बात

अब किसी ओर के साथ न होगी

Tuesday, April 8, 2014

भाषा ख़ामोशी की



शब्द तूफान न ला दे
शायद इसी डर से हर इंसान
अपनी ज़िन्दगी में खमोशी ओढे खड़ा है

ख़ामोशी है या गहरे मन के
कोने में दबा कोई दर्द छिपा है
जो चुप-चाप रह कर छुपने की
कोशिश  कर रहा  है

शब्द शून्य बन गए तो क्या
मेरे भीतर अभी भी भावनाओ का

लावा सा बहा रहा है

Sunday, March 16, 2014

होली के रंग

लाल,हरा,नीला और पीला

रंग लगाए कुछ ऐसा
मन का मैल,नफ़रत
आपसी भेद- भाव
सब मिटे
रंग चढ़े इस होली में कुछ ऐसा

चेहरों पर लिखी जात-पात
ऊँच-नीच,आम और खास के
रंगों में बंधी दुनिया
होली के पर्व में लगाए सब को रंग एक जैसा

होली में रंगे मन सुनहरे फूल
कैसर के रंग जैसा
रंग चढ़े इस होली में कुछ ऐसा

Saturday, February 15, 2014

शब्द छूले तुम्हे मेरे

छोड़ दूँ या रहने दूँ
तुम्हे आवाज़ दूँ या
ख़ामोशी को ही कहने दूँ

शब्द छूले तुम्हे मेरे
या आँखों को ही प्यार का सन्देश
भेजने को कह दूँ

दिल के सन्दुकरी में
अरमान कई छुपे है
धीरे-धीरे सब बोल दूँ....

कोई पुकारता नहीं फिर भी
आवाज़ सुनती हूँ
कोई बंधन नहीं
फिर भी कैद तुझ
में हूँ

सपने देखू तेरे ही मैं
दिन में खुली आँखों से,
हाथ बढ़ा चाहू छूना तुझे
तुम हो जाते गुम

दिल के सन्दुकरी में
अरमान कई छुपे है
धीरे-धीरे सब बोल दूँ...


Monday, February 10, 2014

बचपन का विश्वास



विश्वास की कोई सीमा नहीं होती ओर जब कोई विश्वास को दायरे में बांधने की कोशिश करता है तो विश्वास वही खत्म हो जाता है ,आंख बंद कर कैसे किसी पर विश्वास करे ये मैंने एक पांच साल के बच्चे से सीखा में ओर वो दोनों खेल रहे थे खेल –खेल में वो मेरी पीठ पर अचानक से कूद पड़ा मैंने गिरते हुए उसे संभाला ओर गुस्से से पूछा अगर तुम गिर जाते तो  उसने बड़े प्यार से कहा मुझे पता है आप के होते में नहीं गिरूंगा आप मुझे नहीं गिरने देगी उसके इस जवाब के अन्दर मुझसे ज्यादा विश्वास भरा था की में उसे किसी भी हालत में गिरने नहीं दूंगी.

उसके जवाब ने मुझे जैसे झंझोर दिया मैं सोचने लगी हम बड़े उस निराकार पर भी डर-डर कर विश्वास करते है की कही विश्वास टूट ना जाए...

रब की तलाश

पहला कदम था प्यार का , दिल में जागी एक चाहत , किसी का नाम मालूम न था , बस मन में थी तड़प-इबादत। फिर पास आने की आरज़ू जगी ,   याद म...