Friday, April 7, 2023

मैं तुझसे प्यार नहीं करता

 मैं तुझसे प्यार नहीं करता ।

हां मैं तुझसे प्यार नहीं करता ।।

पर कोई शाम नहीं ऐसी जिसमें
तेरा इन्तजार नहीं करता ।
हां मैं तुझसे .........

शहर में नहीं कोई मंजर जिससे
तेरा जिक्र बेसुमार नहीं करता।
हां मैं तुमसे प्यार नहीं करता ।।

मुश्किल है जीना तेरी यादों के साथ,
अब मैं अपने इश्क़ का इजहार नहीं करता।।
हां मैं तुझसे प्यार नहीं करता।।

लबों से बयां नहीं हुआ मुझसे ये अफशाना,
पर इस मीठे दर्द से दिल इनकार नहीं करता ।।
हां मैं तुझसे.......

जब भी खनक होगी मेरे अंगने में तेरी,
मेरी सांसो के सिवा कोई झंकार नहीं करता।।
हां मैं तुझसे प्यार नहीं करता।।

तेरी गैरमौजूदगी के गवाह होंगे अश्क़ मेरे,
पर अपनों में भी खुद को बेकरार नहीं करता।
हां सच में मैं तुझसे प्यार नहीं करता ।।

तेरे सिवा नहीं कोई जिन्दगी से अब हसरत,
दिल मेरा खुद से भी आंखें चार नहीं करता।
हां मैं तुझसे.....

हाँ हो गया एक दफा बस तुझसे
गुनाह ये मैं बार बार नहीं करता ।
हां मैं तुझसे प्यार नहीं करता ।।

Sunday, March 19, 2023

युवा आत्महत्या की दर में वृद्धि खतरे का संकेत


किसी भी देश का भविष्य वहाँ के युवाओँ और बच्चो को माना जाता है। भारत दुनियाँ का सबसे युवा देश है, हमारी देश की 0-24 वर्ष की आयु की जनसंख्या भारत की 1,210 मिलियन जनसंख्या का 373 मिलियन (30.9%) है, इसका मतलब हर तीसरे व्यक्ति में एक युवा है। युवा जनसंख्या का अधिक होना, अधिक मानव संसाधन किसी भी देश के विकास में अहम् योगदान देता है। दुनिया में कई देश ऐसे है जिनकी औसत जनसंख्या बुजुर्ग है, लेकिन भारत की स्तिथि बहुत मजबूत है। युवा जनसंख्या होना देश के लिया अच्छा है पर साथ ही युवा जनसंख्या को संभालना एक चुनौती भी है। भारत जैसे देश में जहाँ जनसंख्या अधिक है, जिसके कारण देश की बड़ी आबादी के लिए भोजन, स्वस्थय और रोज़गार जुटाना अर्थव्यवस्था पर भार डालता है।

हमारे देश के युवाओं पर हद से ज्यादा दबाव है। अधिक आबादी होने के कारण हर चीज़ के लिए संघर्ष करना पड़ता है अच्छी शिक्षा, स्वास्थ , भोजन और रोज़गार पाना कठिन होता जा रहा है जिसके परिणामस्वरूप कुछ युवा और बच्चे अधिक मानसिक दबाव के कारण आत्महत्या कर रहे है। हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने अगस्त, 2022 में भारत में आत्महत्या से होने वाली मौतों के आंकड़े जारी किए और आंकड़े चौंकाने वाले है । 2021 में देश में कुल 1,64,033 आत्महत्याएं दर्ज की गईं है। आत्महत्या की दर के संदर्भ में, भारत ने 12 (प्रति लाख जनसंख्या) की दर दर्ज की और यह दर 2020 की तुलना में 2021 के दौरान 6.2% की वृद्धि को दर्शाती है। हाल के आकड़ो को देखा जाए तो, बच्चो में ख़ासकर आई.आई.टी, मैनेजमेंट और मेडिकल के छात्रों में आत्महत्या के मामले बढ़ गए है। पढाई के दबाव, आर्थिक तंगी, भेदभाव और अन्य कई कारण आत्महत्या के है। कोरोनावायरस के बाद से मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। स्कूल और संस्थान बंद होने के कारण पढ़ाई पर अधिक असर पड़ा है। जिसके कारण भी युवा परेशान है। देश में आत्महत्याओं की दर में वृद्धि हो गई है युवाओं में आत्महत्या के मामले अधिक पाए जा रहे हैं, जो किसी भी समाज के लिए उचित नहीं माना जा सकता।

 हमें मिलकर इस गंभीर समस्या पर काम करने की जरूरत है हम अपने भविष्य को इतनी आसानी से खो नहीं सकते है। आज के युवा पर बहुत अधिक दबाव है, हम उनकी मदद कर सकते हैं । हर एक व्यक्ति को चाहिए कि अपने आसपास रह रहे लोगों के लिए संवेदनशील हो। आज के भागदौड़ और एकल जमाने में हम अपने आसपास की लोगों पर ध्यान नहीं देते हैं अधिकतर समय हम अपने मोबाइल की आभासी दुनिया में खोए हुए हैं, सोचिए अगर आपको अचानक कुछ हो जाए तो आपकी सहायता सबसे पहले वहां उपस्थित लोग ही करेंगे ना कि आपका मोबाइल। हमें इस मूलभूत बात को हमेशा याद रखनी चाहिए। हम अपने बच्चों और युवाओं की मदद कर सकते हैं

 अगर आप माता-पिता है तो बच्चों पर पढ़ाई का और भविष्य में बहुत अच्छे करने का दवाब नहीं डाले।   माता-पिता की अपेक्षाएं बच्चों को मानसिक तनाव में डालती हैं जिसके कारण भी बहुत सारे युवा आत्महत्या कर रहे हैं। पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन नहीं करने के वजह से भी मामले बढ़ रहे है। शिक्षा को  समाज के विकास के रूप में जाना जाता हैं ना कि जान लेने के अस्त्र के रूप में इसलिए हमें ध्यान रखना होगा हर इंसान की अपनी क्षमता है और हर इंसान अलग काबिलियत के साथ पैदा हुआ है। हम जबरदस्ती किसी को वो नहीं बना सकते हैं जब तक वह उसके अंदर ना हो।

यदि आप मानसिक अवसाद में है तो दोस्तों से मदद ले, दोस्त हमारी जीवन में आम भूमिका अदा करते हैं। खासकर युवावस्था में इसलिए यदि हम अपने किसी भी दोस्त को बहुत अधिक दुखी या मानसिक  दबाव में पाए तो उससे बातें करें और समझने कि कोशिश करे की वह जीवन के दौर से गुजर रहा है। आपकी एक मदद किसी की भी जिंदगी को बचा सकती है। अक्सर लोगों के पास उनके मन की बात सुनाने वाला कोई नहीं होता है क्योंकि लोग जब किसी की बातें सुनते हैं तो धारणाएं बनाने लगते हैं, दोस्ती में ऐसा ना करें सिर्फ अपने मित्र की मदद करें।

 यदि कोई चिकित्सीय सहायता लेना चाहता है तो बहुत सारे विकल्प उपलब्ध हैं आप किसी काउंसलर से बात कर सकते हैं डॉक्टर से मिल सकते हैं या किसी ऐसे से बात करें जिस पर आपको पूरा विश्वास हो।  कोशिश करें आत्महत्या जैसे कदम उठाने से पहले अपने-आप को मौका दे जीने का। परिस्थितियां आपके विपरीत हो सकती हैं लोग-समाज आपके खिलाफ हो सकते हैं। कोई आपको छोड़ सकता हैं, लेकिन आप-अपना साथ नहीं छोड़े । हमें अपने युवाओं को पूरा सहयोग देना होगा नहीं तो हम होनहार बच्चों को खो देंगे।

 

रिंकी राऊत

तू तो गई छोड़

 क्या क्या ना किया तुम को मनाने के लिये 

हर दांव पर खेला तूने, मुझको सताने, के लिये।

मैं ही पागल हूँ करता रहा जो इन्तज़ार तेरा 

तू तो गई छोड़ कभी ना लौट कर आने, के लिये।


छोड़ जाना था तो पींग प्यार की बढ़ाई ही क्यों 

दुखी हूँ बीच मंझधार मुझे यूँ छोड़ जाने, के लिये। 


निकाल फेंका दिल से तूने मक्खन से बाल जैसे 

हिम्मत कहाँ से लाऊँ पर मैं तुझे भुलाने, के लिये।


क्या कभी कर बैठती हो याद इतना तो बता दे

दिल किया अफ़सोस कभी किये पे जताने, के लिये।


हर वक़्त रहती हो ख्यालों में आ जाती ख्वाबों में 

क्या करूँ ध्यान तेरा अपने ज़ेहन से हटाने, के लिये।


तुम तो हो गई मस्त अपनी गृहस्थी को जमा कर 

दिल मेरा न माने तुम बिन जिन्दगी बिताने, के लिये।


सुन मौत की खबर मेरी एक कतरा आंसूँ बहा देना

इतना है काफ़ी मेरी रूह को सकूँ पहुँचाने, के लिये।


मांगता हूँ प्रभु से दुआ खुश रहे आबाद रहे तू सदा 

जा माफ़ किया तुझे 'शर्मा' ने दिल दुखाने, के लिये।


रामकिशन शर्मा

Monday, February 20, 2023

क्या करना

मिथ्या संसार यहाँ तेरा मेरा, क्या करना 
छोड़ना इक दिन जमा डेरा, क्या करना ।

जब साथ जाना नहीं रत्ती-भर भी तो
धन दौलत के अंबार लगा, क्या करना ।

बेआबरू हो जिसके कूचे से हों निकले
दिल-ओ-दिमाग में उसे बसा, क्या करना।

हाथ पाँव चलते रहें मौत तक मेरे मौला
साँस भर लेती जिन्दगी का, क्या करना। 

जरूरत के वक्त पर हो जायें इधर उधर 
ऐसे यार दोस्तों को मुँह लगा, क्या करना।

जिसके दिल में नहीं हमदर्दी तुम्हारे लिए 
बीन दुखों की उसके आगे बजा, क्या करना। 

स्वार्थी दुनिया सारी होती मतलब की यारी
मदद की उम्मीदें किसी से लगा, क्या करना। 

कर्मो का फल भोगने आते हैं सब जीव यहाँ 
किसी से शिकायत गिला शिकवा, क्या करना।

दंगे फसाद का डर हर वक़्त बम फूटने का डर 
डर के साये में यूँ जिन्दगी बीता, क्या करना। 

शरीर पे बुढापे का असर आ जाता नजर 'शर्मा'
बालों को रंगा औ'झुरियों को छुपा, क्या करना। 

रामकिशन शर्मा

Monday, February 13, 2023

उम्मीद की थी

 मिला नहीं वो उम्मीद की थी जहाँ , से 

गिला शिकवा नहीं लेकिन जहाँ  ,से।।


माँ की कोख से जन्म लेते यहाँ सब 

टपकता नहीं कभी कोई आसमाँ ,से  ।।


जिन्दगी गुज़ार दी है सारी देते देते 

घबराता नहीं कभी किसी इम्तिहाँ, से ।।


कुछ भी नहीं लाता साथ अपने कोई 

साथ जा नहीं सकता कुछ भी यहाँ, से ।।


जाने ये कैसा वक़्त आ गया है मेरे यारो  

जी तो लोग रहें हैं पर परेशाँ परेशाँ , से ।।


बाट जोहते जोहते गईं हैं पत्थरा आँखें 

रूखसत होने को हूँ अब तो जहाँ , से ।।


नित्य योगा से गई चमक चेहरे की काया 

ढ़लती उम्र में भी लगे लगने वो जवाँ, से  ।।


बच्चा रोता परिवार हँसता पैदा होता जब 

परिवार रोता रुखसत होता जब जहाँ , से।।


डांटडपट गालीगलौज से नहीं होता हासिल 

हो सकता है जो बोल कर मीठी जुबाँ , से  ।।


कोख में अपनी रखती प्रसव -वेदना सहती

कौन है बढ कर धरती पे ममतामयी माँ, से ।।


जाता पड़ अकेला फंस जाता है मुश्किलों में 

जाता है बिछुड़ जब कोई अपने कारवाँ , से ।।


हर रात की यकीनन सुबह भी होती है यारो

बहार आयेगी फिर घबराता क्यों खिजाँ, से ।।


किसान डरता रहता पड़े ना मार मौसम की 

फसल न हो चौपट ओला बाढ़ सूखा तुफाँ, से ।।


कहाँ ढूँढता फिरता है 'शर्मा' सकूँ तु दिल का 

है ये भीतर ही छुपा तेरे नहीं मिलता दुकाँ , से ।।


रामकिशन शर्मा

रब की तलाश

पहला कदम था प्यार का , दिल में जागी एक चाहत , किसी का नाम मालूम न था , बस मन में थी तड़प-इबादत। फिर पास आने की आरज़ू जगी ,   याद म...